
मंडला। मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में वन और वन्यजीवों की सालभर सुरक्षा में मुस्तैद रहने वाले विभागीय हाथियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए विशेष 'पुनर्यौवन (रिजूविनेशन) कैंप' का आयोजन किया जा रहा है। यह वार्षिक शिविर 14 से 20 सितंबर 2026 तक बालाघाट-मंडला सीमा पर स्थित सुपखार परिक्षेत्र में आयोजित होगा। कान्हा नेशनल पार्क प्रबंधन हाथियों के संरक्षण, सेवा और उनके अमूल्य योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने के उद्देश्य से लगातार 16 वर्षों से इस परंपरा का निर्वहन कर रहा है। वर्तमान में कान्हा के बेड़े में कुल 16 हाथी हैं, जिनमें 9 नर, 6 मादा और एक नवजात शावक शामिल है।
कान्हा के सहायक संचालक प्रकाश कुमार वर्मा के अनुसार, ये विभागीय हाथी पूरे साल बाघ संरक्षण, मानसून गश्त, वन्यजीव ट्रैकिंग और जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशनों में अग्रिम पंक्ति में रहकर सेवाएं देते हैं। इस एक सप्ताह के कैंप के दौरान इन हाथियों को नियमित ड्यूटी से पूरी तरह मुक्त रखा जाएगा ताकि वे प्राकृतिक और तनावमुक्त वातावरण में आराम कर सकें। शिविर में हाथियों को उनका मनपसंद पौष्टिक आहार परोसा जाएगा, जिसमें ताजा गन्ना, मौसमी फल, दलिया, गुड़ और विशेष मिनरल सप्लीमेंट्स शामिल होंगे। हाथियों को एक साथ विचरण करने, खेलने और समूह में समय बिताने का मौका मिलेगा, जो उनके सामाजिक व्यवहार और मानसिक संतुष्टि के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
कैंप के दौरान हाथियों की दैनिक दिनचर्या बेहद खास होगी। रोजाना सुबह हाथियों को जंगल से लाकर स्वच्छ जलस्रोतों में स्नान कराया जाएगा, जिसके बाद महावतों द्वारा उनके शरीर, मस्तक और पैरों की तेल से सघन मालिश की जाएगी। इसके साथ ही वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सकों की टीम प्रत्येक हाथी का विस्तृत शारीरिक परीक्षण करेगी। इस दौरान:
हाथियों के रक्त, मल (फीकल) और मूत्र के नमूने लेकर प्रयोगशाला में रोग परीक्षण के लिए भेजे जाएंगे।
प्रत्येक हाथी की ऊंचाई, वजन और शारीरिक संरचना का माप निर्धारित प्रपत्र में दर्ज कर उनकी फिजिकल हेल्थ रिपोर्ट अपडेट की जाएगी।
नाखूनों और पैरों की विशेष ट्रिमिंग व केयर की जाएगी ताकि संक्रमण का कोई जोखिम न रहे।
हाथियों की देखभाल के साथ-साथ उनके रखवालों के कौशल विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। शिविर के दौरान महावत और चाराकटरों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। वरिष्ठ और अनुभवी महावत नए कर्मचारियों को हाथियों के मनोविज्ञान, सांकेतिक भाषा, रखरखाव और आपातकालीन परिस्थितियों (जैसे उग्र व्यवहार या भीड़ नियंत्रण) में प्रभावी नियंत्रण के व्यावहारिक गुर सिखाएंगे। दोपहर के समय महावतों और हाथियों के बीच संवाद व खेल गतिविधियां होंगी, जिसके बाद शाम को भरपेट भोजन कराकर उन्हें पुनः सुरक्षित वन क्षेत्र में विचरण के लिए छोड़ा जाएगा।
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