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MP को बाल विवाह मुक्त बनाने की तैयारी, 35 हजार CMPO तैनात, हॉटस्पॉट पर लक्षित कार्रवाई


भोपाल। मध्य प्रदेश को बाल विवाह के अभिशाप से पूरी तरह मुक्त करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने मैदानी स्तर पर एक मजबूत प्रशासनिक एवं सामाजिक तंत्र स्थापित किया है। प्रदेश में पंचायत से लेकर जिला स्तर तक 35 हजार से अधिक बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों (CMPOs) को विधिवत तैनात किया गया है। अब बाल विवाह के उच्च प्रभाव वाले 'हॉटस्पॉट' क्षेत्रों की पहचान कर स्थानीय परिस्थितियों व उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लक्षित कार्रवाई की जाएगी। आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल में आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA), 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन और अंतर-विभागीय समन्वय पर विस्तृत मंथन हुआ।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बालिकाओं के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के बुनियादी अधिकारों का गंभीर हनन है। उन्होंने कहा कि मैदानी स्तर पर तैनात 35 हजार सीएमपीओ केवल कानून लागू करने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति के अग्रदूत हैं। मंत्री भूरिया ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों को बाल विवाह की सूचना मिलने पर प्रशासन के दूरस्थ स्तर तक पहुंचने का इंतजार किए बिना स्थानीय स्तर पर ही त्वरित और संवेदनशील हस्तक्षेप करना होगा।

NFHS-6 में सुधार: बाल विवाह दर 23.1% से घटकर 20% हुई

मंत्री भूरिया ने बताया कि केंद्र सरकार के 'बाल विवाह मुक्त भारत अभियान' और राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों से प्रदेश में उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 20-24 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में 18 वर्ष से पहले विवाह का अनुपात NFHS-5 के 23.1 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत पर आ गया है। उन्होंने कहा कि 'मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना' में 18 वर्ष से पूर्व विवाह होने पर लाभ से वंचित करने का प्रावधान बालिकाओं को उच्च शिक्षा से जोड़े रखने और परिवारों को इस कुप्रथा से दूर रखने में प्रभावी सिद्ध हुआ है।

'बाल विवाह मुक्त ग्राम' और देवउठनी ग्यारस की अग्रिम तैयारी

विभाग द्वारा शुरू की गई 'बाल विवाह मुक्त ग्राम' पहल पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि जिन गांवों में विगत एक वर्ष में एक भी बाल विवाह नहीं हुआ है, उन्हें विशेष रूप से सम्मानित और प्रोत्साहित किया जा रहा है। आगामी विवाह सीजन और देवउठनी ग्यारस जैसे पारंपरिक अवसरों को देखते हुए उन्होंने अभी से फील्ड मॉनिटरिंग और सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गरीबी और सामाजिक दबाव से प्रभावित परिवारों तक सिर्फ दंडात्मक दृष्टि से नहीं, बल्कि काउंसिलिंग, आजीविका और सहानुभूति के साथ पहुंचना होगा।

हॉटस्पॉट केंद्रित कार्रवाई और अंतर-विभागीय समन्वय

महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त संदीप जी.आर. ने कार्यशाला में कहा कि सामान्य अभियानों से आगे बढ़कर अब उच्च जोखिम वाली ग्राम पंचायतों और विकासखंडों में डेटा आधारित 'हॉटस्पॉट केंद्रित कार्रवाई' अमल में लाई जाएगी। उन्होंने राजस्व, पंचायत, नगरीय प्रशासन और विशेष रूप से पुलिस विभाग के साथ समन्वय को अनिवार्य बताया।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास संचालक छोटे सिंह ने निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं और पंचायत विकास योजनाओं में बाल विवाह रोकथाम के मुद्दे को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। वहीं विशेष पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार ने सीएमपीओ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और नियमित समीक्षा पर बल दिया। यूनिसेफ के राज्य प्रमुख विलियम हेनलोन जूनियर ने कहा कि किशोरियों का जीवन कौशल और शिक्षा से जुड़ाव ही स्थायी बदलाव की असली कुंजी है।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री निर्मला भूरिया ने यूनिसेफ द्वारा प्रकाशित बाल विवाह रोकथाम मार्गदर्शिका व प्रशिक्षण मॉड्यूल का औपचारिक विमोचन किया। इस अवसर पर युवा चैंपियंस हुमा ख़ान और आशु सुंदरी ने जमीनी स्तर पर बाल विवाह रोकने के अपने प्रेरक अनुभव साझा किए।

Date & Time : 2026-10-06 12:00:07

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