
भोपाल। केंद्रीय बजट 2026-27 में मध्य प्रदेश को केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में 1,12,133 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह राशि 1,11,662 करोड़ रुपये अनुमानित थी, लेकिन पुनरीक्षित बजट में घटकर 1,09,348 करोड़ रुपये रह गई थी। 2026-27 में हिस्से में 2,785 करोड़ रुपये की मामूली बढ़ोतरी प्रदेश के लिए राहत का संकेत है।
प्रदेश में विकास कार्यों की गति को बनाए रखने के लिए धनराशि का एक बड़ा हिस्सा केंद्रीय करों के हिस्से और राज्य के अपने करों से आता है। जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के कर लगाने के अवसर सीमित हो गए हैं, इसलिए केंद्रीय करों में हिस्से का महत्व बढ़ गया है। मध्य प्रदेश को इस हिस्से का 7.34 प्रतिशत मिलेगा।
केंद्रीय सहायता अनुदान में भी कमी की संभावना है। अनुमान है कि 48,661 करोड़ रुपये में से केंद्र द्वारा प्रवर्तित योजनाओं के लिए लगभग 47 हजार करोड़ रुपये ही रहेंगे। इसके कारण राज्य को विकसित भारत जी-राम-जी योजना जैसी केंद्र-राज्य संयुक्त योजनाओं में 30 प्रतिशत अधिक योगदान देना होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामूली बढ़ोतरी प्रदेश के विकास कार्यों की गति को बनाए रखने में मदद करेगी, लेकिन राज्य को अपनी योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था करनी होगी।
मुख्य बिंदु:-
केंद्रीय करों में मध्य प्रदेश को 1,12,133 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान।
2025-26 में पुनरीक्षित बजट से 2,314 करोड़ रुपये की कमी।
जीएसटी के बाद केंद्रीय हिस्से की अहमियत बढ़ी; 7.34% प्रदेश को मिलेगा।
केंद्रीय सहायता अनुदान में संभावित कमी; राज्य को योजनाओं में अधिक योगदान देना होगा।
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