
रामनगर। ग्रामीण इलाकों में जल निगम और ठेकेदारों की भारी मनमानी चल रही है, लेकिन सांसद और विधायक को जनता से कोई मतलब नहीं दिख रहा।
तस्वीर गवाही दे रही है - दीवार पर मीटर बॉक्स और टोंटी लगी है, नीचे नीला पाइप जमीन पर खुला पड़ा है। कनेक्शन ही नहीं जुड़ा, पानी का नामोनिशान नहीं।
नगर परिषद निवासी रामप्रसाद ने बताया -
"विगत दस सालों से हर घर पानी, हर खेत पानी की बातें हो रही हैं, लेकिन पानी सिर्फ सत्ता परस्तों की जेब में ही नजर आता है। जमीन पर जनता को आज भी पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।"
उचेहरा निवासी ग्रामीण के अनुसार इन गांवों में आज तक एक बूंद पानी नहीं पहुंचा- ग्राम जिगना, मर्यादपुर, जटठहा, उचेहरा, छिरहाई, टोला, नौगांव सहित दर्जनों ग्राम और वार्ड।
जमीनी हकीकत -
- कागजों में टेस्टिंग पूरी दिखाकर डिजिटली योजना पूर्ण बताई जा रही है और बिल निकाले जा रहे हैं।
- पाइप गाड़ने की सिर्फ औपचारिकता, जॉइंट खुले पड़े हैं।
- डूब विस्थापित आदर्श ग्रामों की हालत सबसे दयनीय है।
सांसद-विधायक को जनता से कोई मतलब नहीं -
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पेयजल के नाम पर ठेकेदार और जल निगम के अधिकारी मिलकर चांदी काट रहे हैं - काम अधूरा, भुगतान पूरा। और इस पूरे भ्रष्टाचार पर सांसद और विधायक की चुप्पी मिली हुई है। जनता त्रस्त है, जनप्रतिनिधि मस्त हैं। न कोई सुनवाई, न कोई जांच।
ग्रामीणों ने कलेक्टर मैहर से मांग की है कि पूरे मामले की जमीनी जांच हो, दोषी ठेकेदार और अधिकारियों पर कार्रवाई हो और जब तक हर घर में पानी न पहुंचे, तब तक अंतिम भुगतान पर रोक लगाई जाए।
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