
मैहर। शारदीय नवरात्रि के समापन के साथ ही रामनगर में मातारानी के विसर्जन का दौर शुरू हो गया। 9 दिन तक घर-घर में विराजी माँ दुर्गा, महाकाली और गणेश जी की प्रतिमाओं को आज गाजे-बाजे, डीजे और जयकारों के साथ विसर्जन घाट की ओर ले जाया गया। पूरा नगर "अगले बरस जल्दी आना मैया" के नारों से गूँज उठा।
ट्रैक्टर-ट्रालियों से लेकर पिकअप तक, हर वाहन बना चलता मंदिर —
विसर्जन जुलूस में एक नहीं, आधा दर्जन से ज्यादा वाहन शामिल थे। ट्रैक्टर-ट्रालियों पर लाल चुनरी, भगवा झंडे और फूल-मालाओं से सजी विशाल प्रतिमाएं रखी गई थीं। एक ट्राली में माँ दुर्गा शेर पर सवार, तो दूसरी में महाकाली का रौद्र रूप, तो कहीं गणेश जी और दुर्गा जी एक साथ विराजमान थे। एक बोलेरो पिकअप में छोटी प्रतिमा के साथ बच्चे बैठे हुए माँ की गोद का सुख ले रहे थे।

भक्तों का मेला, महिलाओं ने पेश की मिसाल —
जुलूस जहां-जहां से गुजरा, सड़क के दोनों किनारे भक्तों का मेला लग गया। महिलाएं लाल, पीली साड़ियों में, सिर पर ज्वारे कलश लिए, गुलाल उड़ाते हुए नाच रही थीं। युवाओं की टोली ट्रालियों पर चढ़कर माता के गीतों पर थिरक रही थी। बुजुर्ग हाथ जोड़कर आखिरी दर्शन कर रहे थे। कई जगह महिलाओं ने आरती उतारकर माँ को विदाई दी।

भावुक पल —
9 दिन तक जिन माताओं ने व्रत रखा, जगराता किया, आज उनकी आँखें नम थीं। एक महिला बोली - "बेटी की तरह 9 दिन सेवा की, आज विदा कर रहे हैं, मन खाली हो गया।"
बच्चे भी माँ के साथ ट्रालियों में बैठे, सेल्फी लेते, तो कहीं माँ के चरणों में लेटे दिखे। ई-रिक्शा में सवार गणेश जी की प्रतिमा के साथ भी भक्तों का हुजूम चल रहा था।
सुरक्षा और व्यवस्था —
विसर्जन जुलूस रामनगर के मुख्य बाजार, बस स्टैंड, थाना मार्ग होते हुए विसर्जन स्थल की ओर गया। इस दौरान पुलिस की मौजूदगी में शांतिपूर्ण तरीके से सभी प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।
देर शाम तक विसर्जन जारी रहा। भक्तों ने नम आँखों से कहा — "अगले बरस तू जल्दी आ माँ।"



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