
मंडला। कान्हा टाइगर रिजर्व में मलेशिया वन विभाग का सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तीन दिवसीय अध्ययन प्रवास पर पहुंचा है। यह दल कान्हा टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण, प्रबंधन व्यवस्था और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व के मॉडल का अध्ययन करेगा। इस दौरे का उद्देश्य संरक्षण तकनीकों को समझना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा करना है।
अध्ययन प्रवास के पहले दिन खटिया इको सेंटर में विशेष कार्यशाला और परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मलेशियाई प्रतिनिधियों के साथ कान्हा प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यशाला के दौरान वन्यजीव संरक्षण, बाघ प्रबंधन, जैव विविधता और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने Kanha Tiger Reserve में लागू की जा रही आधुनिक संरक्षण तकनीकों की जानकारी भी साझा की।
कार्यक्रम में ग्लोबल टाइगर फोरम के विशेष सलाहकार डॉ. एच.एस. नेगी, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एल. कृष्णमूर्ति, कान्हा के क्षेत्र संचालक रवींद्र मणि त्रिपाठी और उप संचालक अमिथा के.बी. मौजूद रहे।
अधिकारियों ने Kanha Tiger Reserve में अपनाए जा रहे संरक्षण मॉडल, वन्यजीव मॉनिटरिंग सिस्टम और जंगल प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि किस प्रकार स्थानीय समुदायों को संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।
कार्यशाला के बाद मलेशियाई दल ने रिजर्व क्षेत्र का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें अनाथ शावकों के संरक्षण और पुनर्वास केंद्र की व्यवस्थाएं दिखाई गईं।
प्रतिनिधिमंडल ने वन्यजीवों के उपचार, पुनर्वास और निगरानी प्रणाली को करीब से देखा। दल ने Kanha Tiger Reserve की कार्यप्रणाली को प्रभावी और व्यवस्थित बताया।
मलेशियाई प्रतिनिधियों ने कान्हा के संरक्षण मॉडल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यहां अपनाई जा रही व्यवस्थाएं उनके देश में भी उपयोगी साबित हो सकती हैं।
दल अगले दो दिनों तक कान्हा में रहकर संरक्षण गतिविधियों, वन प्रबंधन और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगा।
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