
खंडवा. निजामुद्दीन से एर्नाकुलम जा रही मंगला एक्सप्रेस फूड घटना ने रेलवे की खानपान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. ट्रेन क्रमांक 12618 में सफर कर रहे त्रिचुर के 'हैप्पी कॉन्वेंट स्कूल' के करीब 30 बच्चों को पैंट्रीकार का भोजन करने के बाद अचानक उल्टी, दस्त और तेज बुखार की शिकायत होने लगी, जिसके बाद खंडवा जंक्शन पर ट्रेन को करीब 50 मिनट रोककर बच्चों को आपाताकालीन इलाज मुहैया कराया गया.
इलाज के लिए रुकी ट्रेन: सूचना मिलते ही खंडवा रेलवे स्टेशन पर स्वास्थ्य विभाग और रेलवे की मेडिकल टीमों को तैनात किया गया.
गंभीर मरीज: 30 बीमार बच्चों में से 5 की हालत बेहद चिंताजनक बताई गई थी, जिन्हें डॉक्टरों की टीम ने तुरंत जरूरी दवाएं और ओआरएस (ORS) का घोल दिया.
भुसावल तक डॉक्टरी निगरानी: स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया गया. रेलवे स्टेशन मैनेजर जीएल मीणा के मुताबिक रेलवे डॉक्टर सुभाष पाटिल बच्चों की स्थिति पर नजर रखने के लिए भुसावल तक साथ गए, जहाँ सभी की हालत में सुधार देखा गया.
रेलवे की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल
इतनी बड़ी घटना के बाद भी खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर रेलवे की ओर से दिखाई गई लापरवाही अब चर्चा का विषय बन गई है.
1. खाने के सैंपल न लेने पर उठते सवाल
घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी आईआरसीटीसी (IRCTC) या रेलवे प्रशासन की ओर से पैंट्रीकार के भोजन के सैंपल नहीं लिए गए, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या लापरवाही को छिपाने की कोशिश की जा रही है.
2. अवैध वेंडरों और पैंट्रीकार की गुणवत्ता
ट्रेनों में पैंट्रीकार की सफाई, भोजन की गुणवत्ता और अनाधिकृत वेंडरों द्वारा घटिया खाद्य सामग्री बेचे जाने की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं. यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी के मामले में रेलवे की ढिलाई सामने आ रही है.
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