
नरसिंहपुर. प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देती हुई चित्रकला के माध्यम से डॉ. यतीन्द्र महोबे, विभागाध्यक्ष, चित्रकला विभाग, शासकीय महिला महाविद्यालय, नरसिंहपुर ने नदी संरक्षण की गंभीर समस्या को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है.
उनकी नवीन जलरंग चित्रकला में एक व्यक्ति नदी में कचरे से भरी प्लास्टिक की थैली फेंकता हुआ दिखाई देता है. पृष्ठभूमि में नदी, हरियाली और बस्ती का सुंदर दृश्य है, जो जीवन और प्रदूषण के बीच के विरोधाभास को दर्शाता है.
चित्र का शीर्षक “नदी का दर्द” (The Pain of the River) रखा गया है. इस कृति के माध्यम से कलाकार ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारे जीवन और पर्यावरण का आधार हैं. मनुष्य द्वारा नदियों में प्लास्टिक, कचरा और अन्य अपशिष्ट डालना प्रकृति के प्रति गंभीर लापरवाही है.
डॉ. महोबे ने कहा, “नदी में कचरा फेंकना केवल नदी को गंदा करना नहीं, बल्कि अपने भविष्य को प्रदूषित करना है.” उन्होंने लोगों से नदियों को स्वच्छ रखने तथा जल स्रोतों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का आह्वान किया.
उनकी यह जलरंग कृति कला के माध्यम से सामाजिक एवं पर्यावरणीय जागरूकता का महत्वपूर्ण संदेश प्रस्तुत करती है और लोगों को नदी एवं जल-स्रोतों के संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा देती है.
Leave A Reviews