
देवास जिले के हाटपीपल्या क्षेत्र के ग्राम पितावली में हाल ही में हुई ओलावृष्टि के कारण तीन सौ से अधिक तोतों की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना एक विशालकाय पेड़ पर घातक ओलावृष्टि की चपेट में आने से हुई। पेड़ पर बसेरा करने वाले इन तोतों ने खुद को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे ओलावृष्टि से नहीं बच पाए और उनकी मौत हो गई।
ग्रामीणों ने इन मृत तोतों को एक गड्ढे में दफन कर दिया। गांव के अजय सिंह सेंधव ने बताया कि 300 से अधिक तोतों की मौत हुई है। देवास रेंज के रेंजर राजेश चौहान ने भी ओलावृष्टि से तोतों की मौत की पुष्टि की है।
इससे पहले, खरगोन जिले के बड़वाह क्षेत्र में भी फूड पॉइजनिंग के कारण करीब 250 तोतों की मौत हो गई थी। पशु चिकित्सक मनीषा चौहान ने बताया कि मृत तोतों के पोस्टमार्टम से यह स्पष्ट हुआ कि उनमें फूड पॉइजनिंग के लक्षण पाए गए थे। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग पक्षियों को ऐसी चीजें खाने के लिए दे देते हैं जो उनके पाचन तंत्र के लिए उपयुक्त नहीं होतीं, जबकि कीटनाशक से भरे खेतों से दाना चुगने के बाद यह और भी खतरनाक साबित होता है।
इस घटना के बाद सावधानी के तौर पर क्षेत्र के सभी पोल्ट्री फार्मों की जांच की गई, लेकिन बर्ड फ्लू का कोई लक्षण नहीं मिला।
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