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एमपी हाई कोर्ट का कड़ा रुख: जबलपुर-भोपाल हाईवे पर 2 साल में धंसा 400 करोड़ का पुल, टोल वसूली पर मांगा जवाब


जबलपुर। जबलपुर-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर शहपुरा स्थित रेल ओवरब्रिज के निर्माण के महज दो वर्ष के भीतर ही क्षतिग्रस्त होने के मामले को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस पुल के समय से पहले जर्जर होने, यातायात बाधित रहने और इसके बावजूद लगातार टोल वसूली जारी रहने के मुद्दे पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने इस मामले में मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) और केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को तय की गई है।

MPRDC और केंद्र सरकार से पूछे तीखे सवाल

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित विभागों को आड़े हाथों लिया। अदालत ने एमपीआरडीसी से पूछा है कि शहपुरा रेल ओवरब्रिज की मरम्मत का कार्य कब तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही, केंद्र सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि जब ओवरब्रिज बंद है, तो पौड़ी रेलवे फाटक को बंद रखने का क्या औचित्य है? इस फाटक के बंद होने के कारण आम नागरिकों को भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

400 करोड़ की लागत, 2 साल में ही धंस गया पुल

याचिका में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2023 में लगभग 400 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से इस रेल ओवरब्रिज का निर्माण किया गया था। लेकिन घटिया निर्माण या अन्य तकनीकी खामियों के चलते दो साल के भीतर ही इसमें दरारें आ गईं। हद तो तब हो गई जब फरवरी 2026 में पुल का लगभग 200 मीटर का हिस्सा अचानक धंस गया। इसके चलते जबलपुर-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया और वाहनों को वैकल्पिक ग्रामीण व स्थानीय मार्गों पर डायवर्ट करना पड़ा, जिससे वहां प्रतिदिन लंबा जाम लग रहा है।

पुल बंद, फिर भी टोल वसूली जारी

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में सबसे गंभीर आरोप टोल वसूली को लेकर लगाया है। याचिका के अनुसार, पुल पूरी तरह से बंद है और वाहन इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, इसके बावजूद संबंधित एजेंसियां जनता से टोल टैक्स वसूल रही हैं। इसे जनता के साथ सरेआम अन्याय बताते हुए मामले में जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करने की मांग की गई है। इसके अलावा, डायवर्जन के कारण भारी वाहनों के दबाव से ग्रामीण सड़कें भी टूट रही हैं, जो आगामी मानसून में और बदतर हो सकती हैं।

हाई कोर्ट ने दिए सख्त संकेत

हाई कोर्ट ने इस मामले के जरिए स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि सार्वजनिक धन (Public Money) से बनने वाली अधोसंरचना परियोजनाओं की गुणवत्ता और उनके रखरखाव में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने अब संबंधित एजेंसियों से पुल की वर्तमान स्थिति, मरम्मत की समय-सीमा, टोल वसूली की वैधता और वैकल्पिक यातायात व्यवस्था पर 2 जुलाई तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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