
डिंडोरी। मध्य प्रदेश सरकार के 'जल गंगा संवर्धन अभियान' ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सफलता का परचम लहराया है। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा 22 अप्रैल 2026 को जारी की गई रैंकिंग में मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले ने पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इतना ही नहीं, राज्य का खंडवा जिला भी इस सूची में दूसरे पायदान पर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित इस अभियान ने वर्षा जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन की दिशा में देश के सामने एक मिसाल पेश की है। यह सफलता दर्शाती है कि सुनियोजित सरकारी प्रयासों और जनभागीदारी के समन्वय से पर्यावरण संरक्षण के बड़े लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में यह अभियान 19 मार्च से शुरू किया गया था, जो 30 जून 2026 तक निरंतर जारी रहेगा। इसका मुख्य केंद्र बिंदु वर्षा जल का संचय (Catch the Rain) और पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना है। अभियान के तहत प्रदेश भर में खेत तालाबों का निर्माण, कुओं और बोरवेल का पुनर्भरण (Recharge), अमृत सरोवरों का विकास, रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग और पुराने तालाबों के सौंदर्यीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य युद्ध स्तर पर किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मूल मंत्र 'जहां गिरे, जब गिरे, वर्षा जल का संग्रह करें' को चरितार्थ करते हुए मध्य प्रदेश ने जल संरक्षण को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया है।
आंकड़ों की बात करें तो डिंडोरी जिले ने अब तक 1.23 लाख से अधिक जल संरचनाएं बनाकर देश में शीर्ष स्थान पाया है। वहीं, खंडवा जिले में 87 हजार से ज्यादा संरचनाएं तैयार की गई हैं। संपूर्ण मध्य प्रदेश में अब तक 3.97 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है। सरकार का मानना है कि इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत जनता की सक्रिय भागीदारी है, जिससे न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्तर सुधरेगा, बल्कि शहरी इलाकों में भी भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित होगी। यह उपलब्धि मध्य प्रदेश को जल प्रबंधन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाती है।
Leave A Reviews