
नर्मदापुरम जिले में स्वामित्व पंजीयन योजना के तहत गांवों में संपत्ति पंजीयन का कार्य मैदानी राजस्व कर्मियों के लिए भारी जोखिम का कारण बनता जा रहा है। नर्मदापुरम ग्रामीण तहसील अंतर्गत ग्राम बुधवाड़ा में आयोजित पंजीयन शिविर के दौरान पदस्थ पटवारी नितिन शर्मा के साथ अभद्रता, झूमाझटकी और जान से मारने की धमकी देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के निर्देश पर ग्रामीणों को संपत्ति अधिकार पत्र प्रदान करने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत भवन में विशेष शिविर आयोजित किया गया था।
पटवारी नितिन शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत के अनुसार, रात करीब 8 बजे गांव का निवासी लिखीचंद उर्फ बबली यादव अचानक पंचायत भवन में पहुंचा और चल रहे पंजीयन कार्य को तुरंत बंद कराने की जिद करने लगा। जब कर्मचारियों ने उसे शासकीय कार्य में बाधा न डालने की बात कहकर समझाने का प्रयास किया, तो उसने गाली-गलौज शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर आरोपी ने पटवारी के साथ झूमाझटकी की और जान से मारने की धमकी दी। घटना के दौरान ग्राम कोटवार सतोप मेहरा प्रत्यक्षदर्शी रहे और अन्य कर्मचारियों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही राजस्व महकमे और पटवारी संघ में गहरा आक्रोश फैल गया। पीड़ित पटवारी के समर्थन में 40 से अधिक पटवारी देर रात एकत्रित होकर देहात थाने पहुंचे और शासकीय कार्य में बाधा डालने वाले आरोपी के खिलाफ तत्काल कठोर विधिक कार्रवाई की मांग को लेकर लिखित शिकायत सौंपी।
नर्मदापुरम देहात थाना पुलिस ने पटवारी नितिन शर्मा की रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर आरोपी लिखीचंद उर्फ बबली यादव के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं—धारा 132 (शासकीय सेवक को कर्तव्य निर्वहन से रोकने हेतु हमला/बल प्रयोग), 296(बी) (अश्लील कृत्य/गाली-गलौज), 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 351(3) (आपराधिक धमकी) और 121(1) (शासकीय सेवक पर हमला)—के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। पुलिस ने आरोपी की धरपकड़ और मामले की जांच शुरू कर दी है।
इस घटना ने प्रशासनिक कार्यशैली और तकनीकी खामियों से जूझ रहे मैदानी कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। पटवारी संघ से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि दिन के समय तकनीकी सर्वर ठप रहने के कारण डिजिटल पंजीयन की प्रक्रिया बार-बार अटकती है। इसके विपरीत, वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर से प्रतिदिन 25 से 50 रजिस्ट्रियों का लक्ष्य थोप दिया जाता है और लक्ष्य पूरा न होने पर निलंबन या अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनियां दी जाती हैं। इसी प्रशासनिक दबाव के चलते कर्मचारियों को सुबह जल्दी अथवा रात 8-9 बजे तक सुदूर गांवों में रुककर काम करना पड़ रहा है।
पटवारी मुकेश गौर सहित अन्य कर्मियों ने जोर देकर कहा कि ग्रामीण इलाकों में देर रात तक शिविर चलाने से असामाजिक तत्वों और असंतुष्ट ग्रामीणों के आक्रोश का सीधा सामना फील्ड कर्मचारियों को करना पड़ता है। पटवारियों ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि:
स्वामित्व योजना का कार्य केवल निर्धारित कार्यालयीन समय (सुबह 10 से शाम 5 बजे) में ही कराया जाए।
सर्वर की तकनीकी समस्याओं के लिए कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराने और कार्रवाई का दबाव बनाने की परिपाटी बंद हो।
दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में रात्रि शिविरों की मजबूरी खत्म की जाए और राजस्व दलों को अनिवार्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
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