
रतलाम जिले अंतर्गत सैलाना स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS) में बुनियादी सुविधाओं के अभाव और शैक्षणिक अव्यवस्थाओं से त्रस्त छात्र-छात्राएं अपनी पीड़ा सुनाने के लिए सीधे जिला मुख्यालय की ओर पैदल निकल पड़े। विद्यालय और छात्रावास की बदहाली से नाराज सैकड़ों छात्र करीब 20 किलोमीटर का लंबा सफर पैदल तय कर रतलाम कलेक्ट्रेट पहुंचे।
विद्यार्थियों का आरोप है कि स्कूल और हॉस्टल में पिछले एक महीने से भारी अव्यवस्थाएं व्याप्त हैं। नियमित शिक्षक और अतिथि विद्वान (गेस्ट फैकल्टी) समय पर कक्षाओं में पढ़ाने नहीं आते, जिससे शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। इसके अलावा परिसर व छात्रावास में नियमित साफ-सफाई का घोर अभाव है और भोजन व आवासीय व्यवस्थाएं भी मानकों के अनुरूप नहीं हैं। छात्रों का कहना है कि वे बार-बार स्थानीय स्तर पर शिकायत कर रहे थे, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी सामने नहीं आया, जिसके चलते उन्हें मजबूरन पैदल मार्च का कदम उठाना पड़ा।
छात्रों के सैलाना से रतलाम की ओर पैदल कूच करने की सूचना जैसे ही प्रशासन को मिली, प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। सैलाना एसडीएम, तहसीलदार और विद्यालय का स्टाफ तुरंत मौके पर पहुंचा और रास्ते भर बच्चों को रोककर समझाने की कोशिश की। अधिकारियों ने विद्यार्थियों की सुविधा के लिए मौके पर खाली बसों की व्यवस्था की, ताकि उन्हें वाहन से ले जाया जा सके, लेकिन दृढ़ निश्चयी छात्रों ने बस में बैठने से साफ इनकार कर दिया।
छात्रों के पीछे-पीछे अधिकारियों के वाहन और खाली बसें चलती रहीं। प्रशासनिक अमला लगातार बीच रास्ते में ही समस्याएं बताने और आंदोलन समाप्त करने का अनुरोध करता रहा, परंतु विद्यार्थियों का स्पष्ट कहना था कि वे अपनी समस्याएं केवल और केवल जिला कलेक्टर के समक्ष ही रखेंगे। इस दौरान बच्चों ने मीडिया से भी विस्तृत बातचीत करने से परहेज किया और अपनी बात सीधे शीर्ष प्रशासनिक नेतृत्व तक पहुंचाने की जिद पर अड़े रहे।
करीब 20 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी कर जब विद्यार्थी कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो वहां मौजूद अधिकारियों ने उन्हें अवगत कराया कि कलेक्टर किसी शासकीय कार्य से रतलाम शहर से बाहर हैं। यह सुनकर छात्र कलेक्ट्रेट परिसर में ही जमीन पर धरने पर बैठ गए। अधिकारियों ने परिसर में भी छात्रों से ज्ञापन देने का आग्रह किया, लेकिन छात्र कलेक्टर से ही मुलाकात करने की मांग पर कायम रहे।
इस पूरे घटनाक्रम ने जनजातीय कार्य विभाग की मैदानी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब विभागीय अधिकारियों से हॉस्टल और स्कूल के पूर्व निरीक्षण के संदर्भ में जानकारी मांगी गई, तो जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त प्रियंका राय इस बाबत कोई स्पष्ट तारीख या ब्यौरा उपलब्ध नहीं करा सकीं। प्रशासनिक स्तर पर बच्चों को नाश्ता और पानी उपलब्ध कराया गया है, जबकि छात्र अपनी शिकायतों के ठोस और स्थायी समाधान के लिए डटे हुए हैं।
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