
इंदौर शहर में आगामी गर्मी के दौरान संभावित जल संकट और अल्प वर्षा के प्रभाव से निपटने के लिए इंदौर नगर निगम (IMC) ने सख्त कदम उठाए हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में आयोजित मेयर इन काउंसिल (MIC) की बैठक में सर्वसम्मति से 'नई जल नीति' को मंजूरी दे दी गई। इस नीति के तहत यदि कोई उपभोक्ता नल कनेक्शन पर सीधे मोटर पंप लगाकर मुख्य पाइपलाइन से पानी खींचता पाया गया, तो पहली बार में 5,000 और दोबारा पकड़े जाने पर 10,000 की पेनल्टी लगाई जाएगी। इसी प्रकार, घरों या संस्थानों में पानी का अनावश्यक दुरुपयोग और बर्बादी करने पर पहली बार 2,000, दूसरी बार 5,000 तथा बार-बार उल्लंघन करने पर 10,000 तक का जुर्माना वसूलने का प्रावधान किया गया है। निगम का मानना है कि सीधे मोटर लगाने से टेल-एंड के उपभोक्ताओं तक पानी नहीं पहुंच पाता, जिससे वितरण व्यवस्था चरमरा जाती है।
गर्मी के महीनों में निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बुनियादी ढांचे के विस्तार को मंजूरी दी है। शहर के विभिन्न प्रभावित इलाकों में 300 नए नलकूपों का खनन कराया जाएगा और 100 नलकूपों पर नए मोटर पंप लगाए जाएंगे। इसके अलावा ₹ की लागत से 33 नए आधुनिक ट्रक टैंकर खरीदे जाएंगे, जिनमें 300 लीटर क्षमता वाले 11 इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) टैंकर और 8,000 लीटर क्षमता वाले 22 सीएनजी टैंकर शामिल हैं। जल वितरण में लीकेज, चोरी और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए सभी प्रमुख पानी की टंकियों और जल हाइड्रेंट पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे रियल-टाइम निगरानी संभव हो सकेगी।
शहर में जल वितरण को पारदर्शी और औपचारिक बनाने के उद्देश्य से नगर निगम आगामी 12 नवंबर से 21 दिवसीय विशेष अभियान शुरू करने जा रहा है। इस अभियान के तहत नागरिकों को अपने अनधिकृत व अवैध नल कनेक्शनों को नियमित (वैध) कराने का अवसर दिया जाएगा। इसके साथ ही एमआईसी बैठक में शहर की स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु 2,600 से अधिक सफाई संरक्षकों के पदों पर संविदा नियुक्ति को स्वीकृति दी गई। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए 1,650 से अधिक दैनिक वेतनभोगी/मस्टर कर्मचारियों को विनियमित करने का निर्णय भी लिया गया है। महापौर ने निर्देश दिए कि वरिष्ठता और वरीयता सूची के आधार पर शेष पात्र कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को भी पारदर्शिता से पूरा किया जाए।
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