
नई दिल्ली। देश में आम जनता को सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 42 जरूरी दवाओं की खुदरा कीमतें तय कर दी हैं। ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के तहत जारी इस अधिसूचना के बाद अब डायबिटीज, हृदय रोग, बैक्टीरियल इन्फेक्शन और हार्मोन संबंधी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं काफी सस्ती हो जाएंगी। एनपीपीए द्वारा तय की गई ये कीमतें प्रति यूनिट (टैबलेट/कैप्सूल) के आधार पर अधिकतम सीमा (Celling Price) तय करती हैं, जिससे फार्मेसी या दवा विक्रेता मरीजों से अब निर्धारित सीमा से अधिक चार्ज नहीं कर पाएंगे।
पुरानी बीमारियों के इलाज पर घटेगा खर्च इस कदम का सबसे बड़ा लाभ उन मरीजों को मिलेगा जो लंबे समय से पुरानी बीमारियों (Chronic Diseases) से जूझ रहे हैं। प्राधिकरण ने निश्चित-खुराक संयोजन (FDCs) पर विशेष ध्यान दिया है। उदाहरण के तौर पर, कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली लोकप्रिय दवाओं (एटोरवास्टेटिन और एज़ेटिमाइब) की कीमत अब ब्रांड के आधार पर मात्र 21.36 रुपये से 32.46 रुपये प्रति टैबलेट के बीच सीमित कर दी गई है। वहीं, डायबिटीज के इलाज में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले 'ग्लिक्लाजाइड और मेटफ़ॉर्मिन' कॉम्बिनेशन की कीमत अब 10.53 रुपये प्रति टैबलेट तय की गई है। इसके अतिरिक्त, गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन के इलाज में काम आने वाले एंटीबायोटिक कॉम्बिनेशन (सेफिक्सिम और पोटेशियम क्लैवुलनेट) की कीमत 25 रुपये प्रति टैबलेट निर्धारित की गई है।
महंगी हार्मोनल थेरेपी भी दायरे में सामान्य दवाओं के अलावा, सरकार ने काफी महंगी मानी जाने वाली हार्मोनल थेरेपी को भी मूल्य नियंत्रण के दायरे में ला दिया है। 'रेलुगोलिक्स, एस्ट्राडियोल और नोरेथिंड्रोन एसीटेट' के मिश्रण से बनी हार्मोनल दवा, जिसकी कीमत पहले काफी अधिक थी, अब निर्माता के आधार पर 107.22 रुपये से 120.62 रुपये प्रति टैबलेट के बीच मिलेगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ये अधिकतम कीमतें केवल अधिसूचना में उल्लेखित विशिष्ट फॉर्मूलेशन, स्ट्रेंथ और संबंधित निर्माताओं पर ही लागू होंगी। दवा कंपनियों को तत्काल प्रभाव से नई मूल्य सूची जारी करनी होगी और खुदरा विक्रेताओं के लिए इसे दुकान पर प्रमुखता से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
नियमों के उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई एनपीपीए ने कीमतों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। अधिसूचना के अनुसार, कंपनियां केवल तभी जीएसटी (GST) जोड़ सकती हैं जब वह वास्तव में लागू हो। यदि कोई कंपनी या विक्रेता तय कीमत से अधिक पैसा वसूलते हुए पाया जाता है, तो उसे अधिक वसूली गई पूरी राशि ब्याज सहित सरकारी खजाने में जमा करनी होगी। इस आदेश के प्रभावी होने के साथ ही इन फॉर्मूलेशन से जुड़े पुराने सभी मूल्य आदेश निरस्त माने जाएंगे। सरकार के इस फैसले से स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च में बड़ी कमी आने की उम्मीद है।
Leave A Reviews