
नई दिल्ली। वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम तीन दिवसीय राजकीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं, जहाँ बुधवार को दिल्ली के ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके साथ उच्च स्तरीय मुलाकात की। इससे पहले, राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में वियतनाम के राष्ट्रपति का भव्य औपचारिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी दोनों मौजूद रहे। यह दौरा दोनों देशों के बीच गहरी होती रणनीतिक साझेदारी और सांस्कृतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वागत समारोह के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में बच्चों ने दोनों देशों के ध्वज लहराकर अतिथि का अभिनंदन किया।
बोधगया से शुरू हुई भारत यात्रा राष्ट्रपति तो लाम ने अपनी भारत यात्रा की शुरुआत बिहार के बोधगया से की, जो दोनों देशों के बीच साझा बौद्ध विरासत का प्रतीक है। मंगलवार को बोधगया पहुँचने पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनका स्वागत किया, जिसके बाद राष्ट्रपति लाम ने विश्व प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। बोधगया के दर्शन के बाद वे दिल्ली पहुंचे, जहाँ हवाई अड्डे पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने उनकी अगवानी की। द्विपक्षीय वार्ताओं के क्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने भी राष्ट्रपति लाम से मुलाकात कर सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा की।
द्विपक्षीय वार्ता और रक्षा सौदों पर नजर हैदराबाद हाउस में हुई बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लाम के बीच रक्षा, व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। विशेष रूप से ब्रह्मोस मिसाइल खरीद और रक्षा तकनीक साझा करने जैसे मुद्दों पर भी बातचीत होने की संभावना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि भारत और वियतनाम अपनी रणनीतिक साझेदारी के 10 गौरवशाली वर्ष पूरे कर रहे हैं। राष्ट्रपति लाम, जो वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव भी हैं, अपनी इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी अलग से मुलाकात करेंगे।
मुंबई दौरा और आर्थिक संबंधों पर जोर अपनी यात्रा के अगले चरण में राष्ट्रपति तो लाम 7 मई को मुंबई का दौरा करेंगे। मुंबई में वे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में आयोजित एक विशेष बिजनेस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। यहाँ उनका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करना है। भारत और वियतनाम के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं, जो वर्तमान समय में एक मजबूत 'कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' में बदल चुके हैं। इस दौरे से उम्मीद की जा रही है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को और अधिक मजबूती मिलेगी।
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