भोपाल। सोम डिस्टरी के सस्पेंड लाइसेंस की फीस जमा कराने के मामले में आबकारी विभाग सवालों के घेरे में है। विभाग के डिजिटल सिस्टम में छेड़छाड़ से अधिकारियों की भूमिका संदेहास्पद नजर आ रही है। लाइसेंस निलंबित रहने और मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने के बीच फीस जमा कराए जाने से कई तकनीकी पेंच भी खड़े हो गए हैं।
आबकारी विभाग द्वारा फरवरी 2026 में सोम डिस्टलरीज की कंपनियों के कुल 8 लाइसेंस निलंबित किए थे। शराब के अवैध परिवहन के मामले में विभाग की इस कार्रवाई के खिलाफ कंपनी की अपील हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
हाईकोर्ट द्वारा आबकारी विभाग की कार्रवाई को सोम डिस्टलरी द्वारा अवैध बताने के आरोप खारिज कर चुका है। ऐसे में सुनवाई पूरी होने से पहले लाइसेंस फीस जमा कराने की जल्दबाजी ने विभाग की साख को धूमिल कर दिया है।
हाईकोर्ट ने भी सही मानी कार्रवाई
आबकारी विभाग ने 2023- 24 में शराब के अवैध परिवहन से जुड़े मामले में कार्रवाई की थी। कंपनी द्वारा संतोषजनक जवाब न देने पर मामला उलझ गया। शराब के अवैध परिवहन के इसी केस में कोर्ट से अन्य आरोपियों को सजा सुनाई थी। इसी को आधार बनाकर फरवरी 2026 में कंपनी के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए थे। कंपनी हाईकोर्ट पहुंची थी जहां 2024 के नोटिस पर 2026 में हुई कार्रवाई को अवैध बताया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने नोटिस की एक्सपायरी के तर्क को खारिज कर कार्रवाई को वैध माना था।
लाइसेंस फीस जमा कराने पर सवाल
लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने भी मुहर लगाई थी। इस बीच शराब ठेकों की नीलाम की प्रक्रिया से वंचित कंपनी के इशारे पर आबकारी अधिकारियों ने फीस जमा करा ली। जबकि लाइसेंस की बहाली का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इस पर सरकार की ओर से भी अब तक निर्णय अटका हुआ है। विभाग की कार्रवाई के खिलाफ फीस जमा कराना अधिकारियों और कंपनी में साठगांठ की ओर इशारा कर रहा है।
किसके इशारे पर खोला गया पोर्टल
आबकारी विभाग द्वारा फरवरी माह से प्रदेश में शराब ठेकों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई थी। लाइसेंस सस्पेंड होने के कारण सोम कंपनी इस प्रक्रिया से बाहर हो गई थी। हाईकोर्ट से भी उसे राहत नहीं मिली। इस बीच आबकारी विभाग के किसी अधिकारी के इशारे पर सस्पेंशन के बाद भी लाइसेंस फीस जमा करा ली। इसके लिए अचानक पोर्टल खोला गया। अब सवाल उठ रहे है कि किसके इशारे पर पोर्टल खोला गया और इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई।
जांच हो तो खुलेंगी साठगांठ की परतें
आबकारी विभाग ने कंपनी को ठेका नीलामी से कंपनी को दूर रखने लाइसेंस निलंबित किए थे, लेकिन अब यह कार्रवाई विवादों में घिर गई है। मामले में जांच की मांग उठ रही है। यदि सस्पेंड लाइसेंस की फीस जमा कराने की जांच होती है तो सोम कंपनी से नजदीकी रखने, उसे फायदा पहुंचाने वाले अधिकारियों के चेहरे बेनकाब हो जाएंगे। जांच के लिए निष्पक्ष समिति बनाने की भी मांग की जा रही है।
अब भी विचाराधीन लाइसेंस सस्पेंशन
इन सवाल और जांच की मांग पर प्रदेश के आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सफाई दी है। उनका कहना है किसी को भी लाइसेंस रिन्युअल से वंचित नहीं किया जा सकता। पहले आवेदन मैन्युअली जमा होते थे जो अब ऑनलाइन व्यवस्था के चलते पोर्टल के जरिए जमा हो रहे हैं।
ऑनलाइन आवेदन के साथ फीस जमा कराई जा सकती है। हांलाकि लाइसेंस निलंबन, बहाली और उसे निरस्त करने का अधिकार विभाग के पास है। फिलहाल कंपनी के आवेदन विचाराधीन हैं। इस पर विभाग अथवार सरकार की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया है। आबकारी विभाग हाईकोर्ट के सामने अपना पक्ष रख चुका है।
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