
रामनगर, मैहर. मध्य प्रदेश सरकार डिजिटल इंडिया और लोक सेवा गारंटी के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन रामनगर तहसील में उन दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। ऑनलाइन आवेदन के बाद भी आवेदकों को ऑफलाइन दस्तावेजों के नाम पर दौड़ाया जा रहा है और आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं।
मामला क्या है - तस्वीर खुद गवाही दे रही है
आवेदक* ने मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी पोर्टल पर राजस्व प्रकरण क्रमांक RS/384/0124/3248/2025 के तहत प्रमाण पत्र / EWS* हेतु ऑनलाइन आवेदन किया।
- पंजीयन दिनांक - 21/09/2025
- निराकरण दिनांक - 12/10/2025
लेकिन तहसीलदार कार्यालय रामनगर ने आवेदन को "मूल दस्तावेज प्रस्तुत न करने के कारण" अमान्य कर दिया। आदेश में लिखा है - "आवेदक द्वारा मूल दस्तावेज प्रस्तुत न करने के कारण आवेदन का आदेश पत्र खारिज किया जाता है।"
सबसे बड़ा सवाल - जब आवेदन ऑनलाइन तो ऑफलाइन दस्तावेज क्यों?
1. जब शासन ने MP E-District, लोक सेवा गारंटी पोर्टल बनाया है, जिसमें आवेदक अपने सभी दस्तावेज स्कैन कर अपलोड करता है, तो फिर मूल दस्तावेज की मांग किस नियम के तहत?
2. अगर पोर्टल पर दस्तावेज अपूर्ण था तो 7 दिन के अंदर आपत्ति लगानी चाहिए थी, 21 दिन बाद सीधे रिजेक्ट क्यों?
3. क्या रामनगर तहसीलदार कार्यालय में ऑनलाइन व्यवस्था सिर्फ दिखावा है और असली काम ऑफलाइन टेबल के नीचे होता है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जानबूझकर ऑनलाइन आवेदनों को मूल दस्तावेज के नाम पर रिजेक्ट कर दिया जाता है, ताकि आवेदक परेशान होकर तहसील के चक्कर लगाए और...

इस तरह की कार्यप्रणाली से मुख्यमंत्री जनसेवा योजना और लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 दोनों की मंशा पर पानी फिर रहा है, जिसमें निश्चित समय सीमा में सेवा देना अनिवार्य है।
ग्रामीणों ने कलेक्टर मैहर से मांग की है कि रामनगर तहसील में पिछले 3 महीनों में कितने ऑनलाइन आवेदन मूल दस्तावेज के नाम पर रिजेक्ट हुए, इसकी जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
तो क्या कुर्सी पर बैठकर अधिकारी कर्मचारी ले रहे वेतन--???फील्ड में जा कर सूचना/जानकारी सत्यापित करने की जिम्मेवारी किसकी बड़ा सवाल--????
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