
रामनगर। क्षेत्र में सीमेंट कंपनियों की दबंगई अब पर्यावरण पर भारी पड़ रही है। अल्ट्राटेक बनाम जेपी सीमेंट पर लगभग 30 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण और विनाश का गंभीर आरोप सामने आया है।
सूत्रों के मुताबिक हिनौती, पटना, खोड़री, जुड़मानी, अरगट सहित कई गांवों में वन भूमि पर खुलेआम खनन खोदा जा रहा है। कहीं जेसीबी से पहाड़ काटे जा रहे हैं तो कहीं निर्माण के नाम पर जंगलों को साफ कर डी-फोरेस्टेशन किया जा रहा है।
वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास खत्म हो रहा है, इको-सिस्टम पूरी तरह से बिगड़ चुका है। न सिर्फ वन भूमि, बल्कि क्षेत्र की चरागाह, राजस्व और सार्वजनिक जमीनें भी विलुप्त होने की कगार पर हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सफेदपोशों की मिलीभगत से यह पूरा कारोबार चल रहा है। निर्माण और प्लांट विस्तार के नाम पर वन्य तंत्र पर बड़ा कब्जा किया जा रहा है।
लगातार मिल रही शिकायतों और पर्यावरण बचाओ मुहिम के असर के बाद अब जिम्मेदार प्रशासनिक अमले ने मामले का संज्ञान लिया है। वन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम जल्द ही बड़े पैमाने पर जांच और कार्रवाई की तैयारी में है।
क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की है कि सैटेलाइट मैपिंग से 10 साल के वन क्षेत्र की तुलना कर दोषी कंपनियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। उक्त सम्बन्ध में डीएफओ मैहर विद्याभूषण मिश्रा ने बताया कि वन्य भूमि के सीमेंट कम्पनी व अन्य के द्वारा बड़े रकबे पर अवैध गतिविधियों की शिकायत मिली है,जांच,मौका मुआयना,भौतिक साक्ष्य,एनओसी,लीज, देखी जा रही है वही इन के वन्य पर्यावरण में पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है,जल्द ही आपको इन सबके खिलाफ बड़ी कार्यवाही देखने को मिलेगी।
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