
मैहर। रामनगर मुख्य मार्ग पर देर रात स्ट्रीट लाइट की केबल में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेज थी कि कई मीटर केबल जलकर राख हो गई और पूरे मुख्य मार्ग की स्ट्रीट लाइटें और तिरंगा लाइटें बंद हो गईं। नगर एक बार फिर अंधेरे में डूब गया।
घटना विगत दिनों की है - नगर सौंदर्यीकरण योजना के तहत मुख्य मार्ग पर नई स्ट्रीट लाइटें और तिरंगा लाइटें लगाई गई थीं। करोड़ों की योजना का शोर था कि रामनगर अब चमकेगा। लेकिन चमकने से पहले ही केबल धधक गई।
दो थ्योरी, एक सच -
1. ठेकेदार की थ्योरी - साजिश से लगी आग:
संबंधित संविदाकार का आरोप है कि यह आग अपने आप नहीं लगी, बल्कि साजिश के तहत लगाई गई है। किसी ने जानबूझकर केबल में आग लगाई है ताकि सौंदर्यीकरण कार्य को बदनाम किया जा सके। ठेकेदार ने पुलिस को सूचना देने और जांच की मांग की बात कही है।
2. स्थानीय लोगों की थ्योरी - घटिया माल:
वहीं नगर के जागरूक लोगों और कुछ दुकानदारों का कहना कुछ और ही है। उनका आरोप है कि -
- कॉपर वायर की जगह मौके पर एल्युमिनियम वायर डाल दिया गया।
- हेवी लोड के कारण कमजोर एल्युमिनियम वायर गर्म होकर पिघल गया और शार्ट सर्किट से आग लग गई।
- तारों की क्वालिटी बेहद घटिया थी, जो लोड नहीं झेल पाई।

सवाल जो उठ रहे हैं -
1. अगर साजिश है, तो किसकी साजिश? और रात के अंधेरे में मुख्य मार्ग की केबल तक कौन पहुंच गया?
2. अगर शार्ट सर्किट है, तो क्या वाकई कॉपर की जगह एल्युमिनियम वायर लगाया गया? बिल कॉपर का और माल एल्युमिनियम का?
3. नगर परिषद के इंजीनियरों ने केबल बिछाने के बाद लोड टेस्ट और गुणवत्ता जांच क्यों नहीं की?
फिलहाल संविदाकार पुलिस में शिकायत की बात कर रहे है लेकिन नगर की जनता जानना चाहती है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर लगे मटेरियल की जांच कौन करेगा?
*कहीं ऐसा तो नहीं कि चोरी छुपाने के लिए साजिश का पर्दा डाला जा रहा हो? पुलिस जांच में दूध का दूध, पानी का पानी होना चाहिए।*वही नगर के चौराहों में सीसीटीव्ही कैमरे अनिवार्यतः लगाने चाहिए,जिससे घटनाओं का सही पता चल सके
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