
रामनगर : नगर परिषद रामनगर के 15 वार्डों में इन दिनों पेयजल की भीषण किल्लत बनी हुई है। आलम यह है कि हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी बाणसागर डूब प्रभावित विस्थापितों को 'चुल्लू भर' पानी नसीब नहीं हो रहा है। नगरवासी दिन-रात हैंडपंपों की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन भू-गर्भीय जल स्तर रसातल में चले जाने के कारण अधिकांश बोरवेल पानी की जगह हवा उगल रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जल आवर्धन योजना के तहत डाली गई 'रद्दी प्लास्टिक पाइपलाइन' सरकार की शोभा बनकर रह गई है, जबकि जनता प्यासी है।

मोटर और पाइपलाइन ने बढ़ाई मुसीबत प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर में जलापूर्ति पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से ठप है। पहले मोटर जलने के कारण सप्लाई बाधित हुई और जब मोटर सुधरकर आई, तो टेस्टिंग के दौरान मुख्य पाइपलाइन ही टूट गई। प्रशासन द्वारा इस वर्ष टैंकरों के माध्यम से भी पानी की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। तहसील और जनपद कार्यालयों के सार्वजनिक हैंडपंपों में मोटर डालकर सरकारी अधिकारियों के लिए तो व्यवस्था बना ली गई है, लेकिन आम नागरिकों को वहां से पानी भरने की अनुमति नहीं मिल रही है, जिससे आक्रोश पनप रहा है।

26 सालों से 'बासी' पानी पीने को मजबूर नगरवासी वार्ड नंबर 12 के निवासी घनश्याम गुप्ता ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वे अपने बच्चों को लेकर 2 किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं। वहीं, राजकुमारी नामक महिला ने बताया कि विगत 26 सालों से वे लोग बासी पानी पीकर गुजारा कर रहे हैं। ग्रामीणों का खुला आरोप है कि बाणसागर बहुउद्देशीय परियोजना विस्थापितों के लिए निरुद्देश्य साबित हुई है। उनका कहना है कि यदि पाइपलाइन के बजाय सोन नदी से छोटी नहरें निकाली जातीं, तो न केवल पेयजल मिलता बल्कि पशु-पक्षियों और खेती के लिए भी पानी उपलब्ध होता।
अध्यक्ष ने माना- 'रद्दी कार्य' का खामियाजा भुगत रही जनता नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती दीपा दीपू मिश्रा ने इस संकट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि परिषद लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि पूर्व में किए गए गुणवत्ताहीन और रद्दी कार्यों के कारण आज नगरवासियों को यह खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकारी बजट की स्थिति भी डांवाडोल है, फिर भी पाइपलाइन की मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। अध्यक्ष ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी, लेकिन फिलहाल 'हर घर जल योजना' के जमीनी दावे रामनगर में खोखले नजर आ रहे हैं।
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