
दुर्लभ जंगली बिल्ली 'काराकल'। Source: Getty Images
श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद उत्साहजनक और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। पार्क में कई दशकों के लंबे इंतजार के बाद एक अत्यंत दुर्लभ जंगली बिल्ली 'काराकल' (Caracal) को देखा गया है। वन्यजीव विभाग द्वारा हाल ही में किए गए एक नियमित कैमरा ट्रैप सर्वेक्षण के दौरान इस शानदार और शर्मीले जीव की तस्वीरें कैद हुईं, जिसके बाद से यह खबर और इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
ऑल इंडिया रेडियो न्यूज (AIR News) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'airnewsalerts' पर इस दुर्लभ नजारे की तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों में काराकल रात के अंधेरे में जंगल के भीतर पूरी तरह बेफिक्र होकर घूमता हुआ दिखाई दे रहा है। कूनो नेशनल पार्क, जो वर्तमान में 'प्रोजेक्ट चीता' के तहत अफ्रीकी चीतों के पुनर्वास के लिए दुनिया भर में सुर्खियों में है, वहां काराकल की मौजूदगी मिलना इस बात का सीधा प्रमाण है कि पार्क का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) अब तेजी से सुधर रहा है और अन्य वन्यजीवों के लिए भी अनुकूल बनता जा रहा है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस ऐतिहासिक घटनाक्रम पर गहरी खुशी जताते हुए कूनो के अधिकारियों और वन्यजीव संरक्षण टीम का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'प्रोजेक्ट चीता' का उद्देश्य केवल चीतों को वापस लाना ही नहीं है, बल्कि इसके जरिए पूरे कूनो जंगल, उसके प्राकृतिक आवास और वहां रहने वाले हर छोटे-बड़े वन्यजीव की रक्षा करना है। उन्होंने इसे राज्य के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
काराकल के बारे में खास बातें: काराकल अपनी लंबी टांगों, लाल-भूरे रंग के फर और कानों के ऊपर मौजूद काले बालों के गुच्छों (Tufts) के लिए जानी जाती है। यह बेहद फुर्तीली होती है और हवा में ऊंची छलांग लगाकर उड़ते हुए पक्षियों का शिकार करने में माहिर मानी जाती है। भारत में यह प्रजाति विलुप्ति की कगार पर है।
मध्य प्रदेश के पड़ोसी राज्य राजस्थान से भी इस बिल्ली प्रजाति को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण खबर आ रही है। राजस्थान सरकार ने पिछले महीने ही आधिकारिक तौर पर 'प्रोजेक्ट काराकल' (Project Caracal) की शुरुआत की है। यह 18 महीने की एक विशेष परियोजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य इस दुर्लभ जीव की पारिस्थितिकी, उनके रहने के तौर-तरीकों, आवास और व्यवहार का गहन अध्ययन करना है ताकि भविष्य के लिए एक ठोस और दीर्घकालिक संरक्षण रणनीति तैयार की जा सके।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना देश की चार बड़ी संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से चलाई जा रही है, जिसमें शामिल हैं:
सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री (SACON)
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII)
राजस्थान वन विभाग
सवाई माधोपुर का प्रसिद्ध गैर-सरकारी संगठन 'टाइगर वॉच'
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश के कूनो में काराकल का मिलना और राजस्थान में 'प्रोजेक्ट काराकल' की शुरुआत होना, दोनों राज्यों के जंगलों के अंतर्संबंधों और भविष्य में इस लुप्तप्राय प्रजाति को बचाने की दिशा में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।
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