
मुंबई. देश में बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक क्रांतिकारी प्रस्ताव तैयार किया है. इस नए नियम के तहत, यदि आप किसी नए व्यक्ति को 10,000 से अधिक की राशि ऑनलाइन ट्रांसफर करते हैं, तो वह पैसा तुरंत नहीं बल्कि 1 घंटे की देरी से खाते में पहुँचेगा.
नए नियमों की 4 बड़ी बातें:
1 घंटे का 'विंडो ऑफ रिग्रेट': 10,000 से ज्यादा के भुगतान पर मिलने वाला यह 1 घंटा ग्राहकों को गलत ट्रांजैक्शन रोकने या फ्रॉड का एहसास होने पर उसे कैंसिल करने का मौका देगा.
सुरक्षा का 'किल स्विच': RBI ने बैंकों को एक 'किल स्विच' फीचर देने का सुझाव दिया है. अगर आपको शक हो कि आपका फोन हैक हो गया है, तो आप एक क्लिक से अपनी सभी डिजिटल सेवाओं (UPI, Net Banking) को तुरंत ब्लॉक कर सकेंगे.
बुजुर्गों के लिए 'सेफ्टी लेयर': 70 साल से अधिक उम्र के नागरिकों के लिए 50,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर एक 'ट्रस्टेड पर्सन' (जैसे बेटा या बेटी) की डिजिटल मंजूरी अनिवार्य हो सकती है.
व्हाइटलिस्ट की सुविधा: यदि आप अपने किसी परिचित या नियमित मर्चेंट को पैसे भेज रहे हैं, तो उन्हें 'व्हाइटलिस्ट' में डाल सकते हैं. ऐसे लेन-देन पर 1 घंटे की देरी का नियम लागू नहीं होगा.
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
साइबर अपराधी अक्सर पीड़ितों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करवाते हैं. RBI का मानना है कि यह 'टाइम गैप' उस दबाव को कम करेगा और पीड़ितों को पुलिस या बैंक को सूचित करने का पर्याप्त समय देगा.
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