
वॉशिंगटन. ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच आसमान छूती कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाया है. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने समुद्र में मौजूद ईरानी तेल टैंकरों की खरीद पर 30 दिनों की विशेष छूट देने की घोषणा की है. यह छूट 20 मार्च से 19 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी.
14 करोड़ बैरल तेल से घटेगा बाजार का दबाव
अमेरिकी ट्रेजरी मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट के अनुसार, इस फैसले का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल मार्केट में तेल की किल्लत को दूर करना है. वर्तमान में समुद्र में फंसे ईरानी टैंकरों के जरिए लगभग 14 करोड़ बैरल कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में आएगा. 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं, जिस पर अब लगाम लगने की उम्मीद है.
भारत के लिए क्या हैं मायने?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई बढ़ने और कीमतों में संभावित गिरावट से भारतीय तेल कंपनियों पर दबाव कम होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने रहेंगे, जिससे आम आदमी को महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिलेगी.
मुख्य बिंदु:
अमेरिका ने केवल समुद्र में मौजूद ईरानी टैंकरों के लिए दी है छूट.
युद्ध के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में आया था 40 डॉलर का उछाल.
ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'टेंपरेरी सप्लाई' को खोला गया.
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