
रीवा। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में गर्भवती प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की मौत के चर्चित मामले में 21 दिन बाद बड़ा प्रशासनिक एक्शन हुआ है। श्याम शाह मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने गंभीर आरोपों से घिरीं डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त (बर्खास्त) कर दी हैं। वहीं दूसरी ओर, मामले में निष्पक्ष जांच और एफआईआर की मांग को लेकर पिछले 15 दिनों से आमरण अनशन कर रहे कल्पना के पिता रामशरण मिश्रा को बुधवार को पुलिस-प्रशासन की टीम ने सिरमौर चौराहा स्थित धरना स्थल से जबरन हटा दिया।
विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर सेवा समाप्ति का आदेश
श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ पहले से ही गंभीर विभागीय जांच लंबित थी। वर्ष 2023 में शासकीय अस्पताल से मरीजों को निजी नर्सिंग होम में रेफर करने के आरोपों की जांच हेतु चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में डॉ. अग्रवाल के विरुद्ध दीर्घशास्ति (कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई) की अनुशंसा की थी। इसके बाद उन्हें सेवा से पृथक करने का प्रस्ताव विचाराधीन था, जिस पर अब अमल करते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
15 दिन से भूख हड़ताल पर थे पिता, स्वास्थ्य बिगड़ने पर उठाया
बेटी और नवजात के हत्यारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर अड़े बुजुर्ग पिता रामशरण मिश्रा 15 दिनों से अन्न-जल त्यागे सिरमौर चौराहे पर बैठे थे। लगातार अनशन से उनकी शारीरिक स्थिति गंभीर हो गई थी। बुधवार को पुलिस टीम ने उन्हें धरना स्थल से हटा दिया, जिसका परिजनों और कांग्रेस नेताओं ने कड़ा विरोध किया। परिजनों का कहना है कि सिर्फ एक डॉक्टर की बर्खास्तगी से उन्हें न्याय नहीं मिला है; वे सभी दोषियों पर आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज होने तक लड़ाई जारी रखेंगे।
मामले में अब तक की प्रशासनिक कार्रवाइयां:
डॉक्टर बर्खास्त: डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवाएं समाप्त।
चार स्वास्थ्यकर्मी निलंबित: दो स्टाफ नर्स, ड्यूटी डॉक्टर डॉ. सोनल अग्रवाल व डॉ. निधि पांडे पूर्व में निलंबित की जा चुकी हैं।
अधीक्षक पदमुक्त: अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटाया गया।
डीन का तबादला: रीवा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल का सतना ट्रांसफर।
भोपाल से उच्चस्तरीय जांच: राज्य स्तर की टीम ने परिजनों व डॉक्टरों के बयान दर्ज किए।
प्रशासन व विपक्ष का रुख
तहसीलदार शिवशंकर शुक्ला ने बताया कि सिरमौर चौराहा शहर का मुख्य व व्यस्ततम इलाका है, जहां लंबे समय से धरने के कारण कानून-व्यवस्था व यातायात बाधित हो रहा था, इसलिए यह कदम उठाया गया। वहीं कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विनोद शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार न्याय की मांग कर रहे एक बेबस पिता के शांतिपूर्ण आंदोलन को पुलिसिया बल से दबाने का प्रयास कर रही है।
Leave A Reviews