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रीवा संजय गांधी अस्पताल अधीक्षक हटाए गए, प्रसूता-नवजात मौत मामले में कार्रवाई


रीवा स्थित संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (SGMH) में 22 वर्षीय प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की मौत के सात दिन बाद शासन ने कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। रीवा संजय गांधी अस्पताल अधीक्षक हटाए गए आदेश के तहत विवादों में घिरे तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया गया है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की अपर सचिव सीमा डेहरिया द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. प्रियंक शर्मा को अस्पताल का नया अधीक्षक नियुक्त किया गया है।

गर्भवती की आखिरी गुहार और ड्यूटी से नदारद डॉक्टर पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने उस समय तूल पकड़ा जब मौत से पहले कल्पना मिश्रा का एक हृदयविदारक वीडियो सामने आया था। वीडियो में प्रसूता रोते हुए यह कहती सुनाई दे रही थी कि "ये लोग मुझे मार डालेंगे।" इसके कुछ ही देर बाद उपचार के दौरान महिला और उसके नवजात शिशु दोनों की सांसें थम गईं। जांच में यह तथ्य भी उजागर हुआ कि घटना के दिन संबंधित महिला चिकित्सक अपनी तय ड्यूटी अवधि के दौरान अस्पताल में उपस्थित नहीं थीं, जिससे अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं और मरीजों की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

अधीक्षक के विवादित बोल और राजनीतिक दबाव

जच्चा-बच्चा की मौत के बाद जब शोकाकुल परिजन न्याय की मांग लेकर अधीक्षक कार्यालय पहुंचे, तब डॉ. राहुल मिश्रा का परिजनों को फटकार लगाते हुए एक और वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में अधीक्षक परिजनों से आपत्तिजनक लहजे में यह कहते सुने गए कि "22 साल की बहन को गर्भवती करवा दिया..."। इस असंवेदनशील टिप्पणी को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत कई विपक्षी नेताओं ने सरकार पर तीखा हमला बोला और अधीक्षक पर उप मुख्यमंत्री के करीबी होने के चलते संरक्षण मिलने का आरोप लगाया। हालांकि, चौतरफा घिरने के बाद डॉ. मिश्रा ने माफी मांगी थी, लेकिन जनआक्रोश के चलते शासन ने उन्हें पद से हटा दिया।

7 सदस्यीय जांच समिति गठित, सीएम ने दी 2 लाख की सहायता

प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतका के पीड़ित परिवार को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। मामले में प्राथमिक तौर पर चार स्वास्थ्य कर्मचारियों को निलंबित भी किया जा चुका है। घटना की विस्तृत व निष्पक्ष पड़ताल के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई है, जिसने अस्पताल पहुंचकर मेडिकल रिकॉर्ड और ड्यूटी रोस्टर जब्त कर लिए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद इलाज में लापरवाही बरतने वाले अन्य चिकित्सकों पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की संभावना है।

Date & Time : 2026-09-02 07:54:38

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