
रीवा. मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सेमरिया में दशहरा उत्सव के दौरान रावण दहन को लेकर अनोखा विवाद सामने आया। यहां रावण का पुतला तैयार करते समय कारीगर से ऐसी चूक हुई कि दशहरे के दिन होने वाला दहन टालना पड़ा। दरअसल, इस बार रावण के पुतले में परंपरा के मुताबिक 10 सिरों की जगह केवल 9 सिर बनाए गए थे। यह बात सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई और देखते ही देखते मामला विवाद में बदल गया। आखिरकार पुतले में दसवां सिर जोड़ने के बाद करीब 24 घंटे की देरी से रावण दहन किया गया।
सेमरिया में दशहरा उत्सव समिति हर साल रावण का विशाल पुतला तैयार कराकर दशहरा पर्व मनाती है। इस बार भी आयोजन की तैयारियां की गई थीं, लेकिन पुतले के निर्माण के दौरान हुई कथित चूक ने पूरे कार्यक्रम को प्रभावित कर दिया।
जानकारी के मुताबिक, रावण के पुतले में 10 सिर होने चाहिए थे, लेकिन तैयार पुतले में केवल 9 सिर ही दिखाई दिए। जब स्थानीय लोगों का ध्यान इस ओर गया, तो उन्होंने इसे परंपरा और धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर आपत्ति जताई। कुछ लोगों ने नौ सिर वाले पुतले का दहन करने का विरोध किया। इसके बाद आयोजन स्थल पर तनाव की स्थिति बनने लगी और निर्धारित समय पर रावण दहन नहीं हो सका।
विवाद बढ़ने की सूचना मिलने पर सेमरिया पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। इस दौरान आयोजन समिति को पुतले में छूटा हुआ दसवां सिर जोड़ने के लिए कहा गया, ताकि विवाद का समाधान निकाला जा सके और कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया जा सके।
इसके बाद कारीगरों ने पुतले में लगाने के लिए दसवां सिर तैयार करने का काम शुरू किया। आवश्यक सुधार पूरा होने तक रावण दहन का कार्यक्रम स्थगित रहा। आयोजन से जुड़े लोगों ने पुतले को ठीक करने के बाद ही दहन करने का निर्णय लिया।
पुतले में सुधार करने के लिए कारीगरों ने अतिरिक्त सिर तैयार किया और उसे रावण के पुतले में जोड़ दिया। इस प्रक्रिया में समय लगने के कारण कार्यक्रम अगले दिन तक टल गया।
दसवां सिर लगाए जाने के बाद पुतले को दहन के लिए तैयार किया गया। इस तरह निर्माण के दौरान हुई एक छोटी-सी चूक के कारण दशहरा उत्सव का कार्यक्रम अपने निर्धारित समय से करीब एक दिन पीछे चला गया।
अगले दिन पुलिस की मौजूदगी में रावण दहन कराया गया। इसके बाद आयोजन स्थल पर स्थिति सामान्य हुई और लोगों ने परंपरागत तरीके से उत्सव मनाया। स्थानीय स्तर पर पुलिस की भूमिका की सराहना किए जाने की भी जानकारी सामने आई।
इस घटनाक्रम ने दिखाया कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में छोटी-सी चूक भी विवाद का कारण बन सकती है। ऐसे समय में संवाद, संयम और समय रहते समाधान निकालना महत्वपूर्ण होता है।
आमतौर पर दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन रावण के पुतले का दहन उत्सव का प्रमुख हिस्सा होता है। लेकिन रीवा जिले के सेमरिया में पुतले के सिरों की संख्या को लेकर हुए विवाद ने इस बार आयोजन को अलग वजह से चर्चा में ला दिया।
नौ सिरों वाले पुतले पर आपत्ति के बाद दसवां सिर जोड़ने और फिर दहन किए जाने की घटना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी रही। अंततः विवाद के समाधान के बाद रावण दहन संपन्न हुआ और दशहरा उत्सव की परंपरा पूरी की गई।
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