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हाउसिंग बोर्ड के घर की लीज निरस्त करने पर लगा ब्रेक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सीलिंग का संशय बरकरार


सतना, देशबन्धु। मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (हाउसिंग बोर्ड) की आवासीय संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने के विरुद्ध चल रही लीज निरस्तीकरण की सख्त कार्रवाई पर फिलहाल उच्च स्तर से अस्थाई रोक लग गई है। भोपाल स्थित मंडल मुख्यालय से जारी नए निर्देश के बाद कार्रवाई के दायरे में आने वाले संपत्ति धारकों ने तात्कालिक राहत की सांस ली है। हालांकि, जिन संपत्तियों की लीज पूर्व में निरस्त की जा चुकी है, उनकी बहाली को लेकर अभी भी संशय की स्थिति बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवासीय क्षेत्रों में अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग पर देशव्यापी स्तर पर सीलिंग के कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बाद इस राहत की मियाद पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गौरतलब है कि सतना शहर के पॉश इलाके भरहुत नगर में हाउसिंग बोर्ड द्वारा लीज निरस्त करने की कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर तेज हो गए थे। इसी बीच 1 अक्टूबर को भोपाल से कार्रवाई स्थगित करने का आदेश जारी हुआ, जो 2 अक्टूबर को सार्वजनिक हुआ। इसके बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ मच गई। वस्तुस्थिति यह है कि यह स्थगन आदेश केवल सतना के लिए नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए लागू किया गया है। हाउसिंग बोर्ड आयुक्त गौतम सिंह द्वारा 1 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र (क्रमांक 698-99) भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा, कटनी और सिंगरौली सहित प्रदेश के 20 से अधिक जिलों के विभागीय अधिकारियों को प्रेषित किया गया है, जिसमें अगले आदेश तक कार्रवाई स्थगित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: बिना भेदभाव सीधे सीलिंग के निर्देश

प्रशासनिक स्तर पर भले ही लीज निरस्तीकरण टल गया हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हालिया ऐतिहासिक फैसले ने स्थानीय नगरीय प्रशासन के हाथ बांध दिए हैं। उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की खंडपीठ ने देश भर के सभी नगर निगमों एवं स्थानीय निकायों को सख्त हिदायत दी है कि आवासीय संपत्तियों में नियमों के विरुद्ध चल रहीं दुकानें, क्लीनिक, कार्यालय और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बिना किसी देरी के सील किया जाए। अदालत ने स्पष्ट चेताया है कि सीलिंग की यह कार्रवाई बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू होनी चाहिए; यदि अधिकारियों ने 'पिक एंड चूज' (चयनात्मक कार्रवाई) की नीति अपनाई, तो इसे न्यायालय की अवमानना माना जाएगा।

अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर यदि कोई कानूनी विवाद न्यायालय में विचाराधीन है, तब भी स्वीकृत मास्टर प्लान के विपरीत व्यावसायिक इस्तेमाल पाए जाने पर सीलिंग की कार्रवाई रोकी नहीं जाएगी। चूंकि हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियां भी नगर निगम सीमा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं, ऐसे में जानकारों का मानना है कि यदि नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में अभियान शुरू करता है, तो हाउसिंग बोर्ड के भवनों को सील होने से बचा पाना संभव नहीं होगा।

Date & Time : 2026-10-03 14:10:37

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