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रामनगर विकासखंड के सैकड़ों गांवों में धान पर पत्ता लपेट कीट का कहर, हटवा से उचेहरा तक किसान परेशान

कई एकड़ तक फसल प्रभावित, एक रोग पर कई दवाएं बेचने का बाजार में फंडा, खेती में कीटनाशक जहर का प्रकोप चरम पर

रामनगर. जिला मैहर. रामनगर विकासखंड के सैकड़ों ग्रामों में इस समय धान की फसल पर पत्ता लपेट (लीफ फोल्डर) कीट का भारी प्रकोप है. हटवा, नारायणपुर, सगौनी, जिगना, पदमी, अमिलिया, उचेहरा सहित क्षेत्र के अधिकांश गांवों के किसान इससे प्रभावित हैं. खेतों में पत्तियां मुड़कर सफेद पड़ रही हैं और पौधों की बढ़वार रुक गई है.

किसान संतोष द्विवेदी के 10 एकड़ में प्रकोप
नारायणपुर हटवा निवासी किसान संतोष द्विवेदी ने बताया कि उनके लगभग 10 एकड़ से ज्यादा धान की फसल पर पत्ता लपेट कीट का प्रकोप है. उन्होंने बताया कि यही हालत क्षेत्र के अन्य किसानों के खेतों की भी है. फसल को बचाने के लिए किसान बाजार की ओर भाग रहे हैं.

बाजार में महंगे कीटनाशकों की भरमार, वैरायटी और कीमत अलग-अलग
किसानों का कहना है कि बाजार में विभिन्न प्रकार के महंगे कीटनाशक मिल रहे हैं, जिनकी वैरायटी और कीमत अलग-अलग है. एक ही रोग के लिए कई कंपनियों की कई दवाएं दुकानों में सजी हैं, जिससे किसान भ्रमित हो रहा है.

डॉक्टरों जैसी मुनाफाखोरी अब कीटनाशक दुकानों पर
किसानों ने कहा कि जिस तरह इंसानों को मामूली सर्दी, खांसी, बुखार में पैरासिटामोल, दर्द निवारक, गैस की, विटामिन की, एलर्जी की, एंटीबायोटिक दवाएं थोक के भाव प्रिस्क्रिप्शन में लिख दी जाती हैं, आजकल वही हाल बीज, खाद, कीटनाशक की दुकानों का है. दुकानदार एक ही कीट के लिए कीटनाशक के साथ कृमिनाशक, टॉनिक, खरपतवारनाशक सब थमा दे रहे हैं. मुनाफाखोरी का अंजाम सबके सामने है, खेती में जहर का प्रकोप चरम पर है.

उपचार और रासायनिक दवाओं का उचित उपयोग
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार -

1. सांस्कृतिक नियंत्रण: खेत से 2-3 दिन पानी सुखा दें, लिपटी पत्तियों को तोड़कर नष्ट करें.

2. जैविक उपाय: नीम तेल 5% - 1 लीटर प्रति एकड़.

3. रासायनिक नियंत्रण (किसी एक दवा का ही प्रयोग करें):
- कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4% जीआर - 8 से 10 किलो प्रति एकड़ भुरकाव
- क्लोरानट्रानिलिप्रोल 18.4% एससी (कोरोजन) - 60 मिली प्रति एकड़
- फ्लूबेंडियामाइड 20% डब्ल्यूजी (फेम) - 50 ग्राम प्रति एकड़
- कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 50% एसपी - 400 ग्राम प्रति एकड़

सभी दवाओं का छिड़काव 100 से 120 लीटर पानी में, सुबह या शाम के समय ही करें. अनुशंसित मात्रा से अधिक प्रयोग न करें.

किसानों ने कृषि विभाग से मांग की है कि प्रभावित सैकड़ों गांवों में टीम भेजकर सर्वे किया जाए और किसानों को सही दवा की सही सलाह दी जाए.

Date & Time : 2026-09-23 07:16:41

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