
सिवनी (छपारा): मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में नरवाई (फसल के अवशेष) जलाने की जानलेवा प्रथा ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। छपारा क्षेत्र के ग्राम बर्रा निवासी एक अतिथि शिक्षक दंपति गुरुवार शाम नरवाई की आग की चपेट में आ गए। इस भीषण हादसे में पत्नी की नागपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि पति की हालत गंभीर बनी हुई है। गनीमत रही कि आसपास के लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दंपति के दो मासूम बच्चों को सुरक्षित बचा लिया।
तेज आंधी और आग का तांडव जानकारी के अनुसार, ग्राम बर्रा निवासी यतेन्द्र नागले और उनकी पत्नी जयश्री नागले (38), जो छपारा के सांदीपनि विद्यालय में अतिथि शिक्षक थे, गुरुवार शाम अपने दो बच्चों के साथ बाइक से एक शादी समारोह में शामिल होने देवरी माल क्षेत्र जा रहे थे। रास्ते में खेतों में लगी नरवाई की आग तेज हवाओं के कारण सड़क के किनारे तक पहुंच गई थी। इसी दौरान अचानक चली तेज आंधी से उनकी बाइक अनियंत्रित होकर आग धधक रहे खेत में जा गिरी।
बच्चों की बची जान, मां ने तोड़ा दम आग की लपटों ने जयश्री नागले को बुरी तरह घेर लिया। उन्हें बचाने की कोशिश में यतेन्द्र भी गंभीर रूप से झुलस गए। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए दोनों बच्चों को आग की पहुंच से बाहर निकाला, जिससे उनकी जान बच गई। झुलसे हुए दंपति को तत्काल सिवनी जिला अस्पताल और फिर वहां से गंभीर हालत में नागपुर रेफर किया गया। शुक्रवार को नागपुर में उपचार के दौरान जयश्री नागले ने दम तोड़ दिया, जबकि यतेन्द्र का इलाज अभी जारी है।
मदद के लिए आगे आए शिक्षक इस दुखद घटना से पूरे क्षेत्र के शिक्षा जगत और आम जनता में शोक की लहर है। इस संकट की घड़ी में जिले के अन्य शिक्षक और शिक्षिकाएं पीड़ित परिवार के लिए आर्थिक मदद जुटाने के अभियान में जुट गए हैं।
आंधी-तूफान से जनजीवन अस्त-व्यस्त हादसे के वक्त क्षेत्र में चले भीषण आंधी-तूफान ने अन्य जगहों पर भी भारी तबाही मचाई। कई विशाल पेड़ गिर गए और घरों के टीन शेड उड़ गए। नगर के शनिचरी निवासी भोजराम भारद्वाज के घर पर आम का पेड़ गिरने से भारी नुकसान हुआ है। बिजली के तार टूटने से कई घंटों तक विद्युत व्यवस्था भी बाधित रही।
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