
सिंगरौली जिले अंतर्गत जियावन थाना क्षेत्र की कुदवार पुलिस चौकी के तहत आने वाले पथरकुड़ी के जंगल में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब झाड़ियों के बीच एक लावारिस संदिग्ध बोरी पड़ी मिली। बोरी से उठ रही असहनीय सड़ांध और दुर्गंध के चलते पूरे इलाके में यह अफवाह तेजी से फैल गई कि किसी व्यक्ति की हत्या कर शव के टुकड़े बोरी में भरकर फेंके गए हैं। सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ जंगल के समीप जमा हो गई।
चरवाहे ने देखी बोरी, सरपंच के जरिए पुलिस को दी सूचना
जानकारी के अनुसार, पथरकुड़ी के जंगल की ओर बकरियां चराने गए ग्रामीण रामप्रसाद की नजर सबसे पहले इस लावारिस बोरी पर पड़ी थी। बोरी के समीप पहुंचते ही जब उसे असहनीय दुर्गंध का अहसास हुआ, तो उसने अनहोनी की आशंका के चलते तत्काल गांव के सरपंच और अन्य प्रबुद्धजनों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत कुदवार चौकी पुलिस को मामले की सूचना दी।
मौके पर पहुंची पुलिस टीम, प्राथमिक जांच में जानवर के मांस की आशंका
सूचना मिलते ही कुदवार चौकी प्रभारी पुलिस बल के साथ आनन-फानन में घटनास्थल पर पहुंचे और क्षेत्र को सुरक्षित घेरे में लेकर संदिग्ध बोरी को अपनी कस्टडी में लिया। दुर्गंध इतनी तीव्र थी कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को चेहरे पर कपड़ा बांधकर पड़ताल करनी पड़ी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए देवसर एसडीओपी (SDOP) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर बोरी को विधिवत जब्त कर लिया है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक और प्रत्यक्ष निरीक्षण के आधार पर यह इंसानी शरीर के अंग या शव के टुकड़े प्रतीत नहीं हो रहे हैं, बल्कि किसी मृत जानवर के सड़े-गले मांस के टुकड़े लग रहे हैं।
वास्तविक स्थिति साफ करने के लिए कराई जाएगी फॉरेंसिक जांच
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जंगल के भीतर इस प्रकार संदिग्ध अवस्था में मांस के टुकड़े किसने और किन परिस्थितियों में फेंके हैं, इसकी गहन जांच की जा रही है। किसी भी तरह के संदेह को दूर करने और मामले की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बरामद मांस के नमूनों को फॉरेंसिक लैब (FSL) भेजा जाएगा।
पुलिस का कहना है कि फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट हो सकेगा कि टुकड़े किस प्रजाति के हैं। एहतियात के तौर पर पुलिस आसपास के गांवों के लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि जंगल में यह सामग्री कब और किसके द्वारा छोड़ी गई थी।
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