
सागर जिले अंतर्गत खुरई सिविल अस्पताल से गंभीर अव्यवस्था और लापरवाही का मामला सामने आ रहा है। मौसमी बीमारियों और बारिश के दौर में जहां एक ओर अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की आवाजाही कई गुना बढ़ गई है, वहीं दूसरी ओर रात होते ही समूचा अस्पताल परिसर घने अंधेरे के आगोश में समा जाता है।
करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से निर्मित इस आधुनिक अस्पताल भवन में प्रकाश की समुचित व्यवस्था न होने से मरीजों और परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रात के समय अंधेरे की वजह से परिसर में सुरक्षा संबंधी गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे हैं।
अस्पताल परिसर में नियमित प्रकाश व्यवस्था के ठप रहने को लेकर अब स्थानीय नागरिकों और मरीजों के बीच तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि:
क्या करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद बुनियादी लाइटिंग और बैकअप की व्यवस्था न होना केवल एक प्रशासनिक लापरवाही और संयोग है, या फिर इसके पीछे कोई सोची-समझी मंशा (प्रयोग) छिपी है?
स्थानीय स्तर पर यह आशंका भी जताई जा रही है कि परिसर में फैले अंधेरे का अनुचित लाभ उठाकर असामाजिक तत्व अनधिकृत गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं।
पूर्व में भी अस्पताल परिसर में एक प्रशासनिक अधिकारी को कर्मचारियों द्वारा संदिग्ध परिस्थिति में पकड़े जाने का मामला सुर्खियों में रहा था, जो अपने रसूख के दम पर निकल गए थे। ऐसी घटनाओं के मद्देनजर अंधेरे की स्थिति और अधिक संवेदनशील हो जाती है।

आपातकालीन स्थिति में रात के समय वार्डों से बाहर निकलने वाले तीमारदारों को आवागमन में भारी असुविधा होती है। विषैले जीव-जंतुओं के खतरे के साथ-साथ परिसर में खड़े वाहनों और परिजनों के सामान की चोरी का डर भी लगातार बना रहता है।
अब सबसे बड़ा और सीधा सवाल यह है कि स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदार अधिकारी इस घोर अव्यवस्था पर अपनी आंखें कब खोलेंगे? क्या अस्पताल प्रबंधन रोशनी की माकूल व्यवस्था बहाल करेगा या फिर मरीजों को इसी तरह अंधेरे और असुरक्षा के साए में इलाज कराने को विवश होना पड़ेगा?
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