
नई दिल्ली: सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े व्यापक संवैधानिक मुद्दों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (8 अप्रैल 2026) को एक ऐतिहासिक टिप्पणी की। नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी धर्म में कौन सी प्रथा 'अंधविश्वास' की श्रेणी में आती है, यह तय करने का अधिकार और अधिकार क्षेत्र न्यायपालिका के पास है। कोर्ट की यह टिप्पणी केंद्र सरकार के उस तर्क के जवाब में आई, जिसमें कहा गया था कि एक धर्मनिरपेक्ष अदालत धार्मिक बारीकियों का फैसला नहीं कर सकती।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र का पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि न्यायाधीश कानून के विशेषज्ञ होते हैं, धर्म के नहीं। उन्होंने कहा कि समाज की विविधता के कारण जो एक के लिए धर्म है, वह दूसरे के लिए अंधविश्वास हो सकता है। मेहता ने दलील दी कि अनुच्छेद 25(2)(बी) के तहत किसी धार्मिक प्रथा में सुधार करने या उसे अंधविश्वास घोषित करने का अधिकार केवल विधायिका (संसद/विधानसभा) के पास है, न कि अदालत के पास। उन्होंने नागालैंड और महाराष्ट्र के उदाहरण देते हुए कहा कि धार्मिक प्रथाओं को केवल विधायिका ही सुधार कानूनों के जरिए नियंत्रित कर सकती है।
पीठ में शामिल न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने केंद्र की दलील को "अत्यधिक सरल" बताते हुए कहा कि अदालत के पास यह जांचने का पूरा अधिकार है कि कोई प्रथा अंधविश्वास है या नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अदालत में यह नहीं कहा जा सकता कि विधायिका का निर्णय ही अंतिम शब्द होगा। वहीं, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने सवाल उठाया कि यदि 'जादू-टोना' जैसी प्रथाओं पर विधायिका मौन रहे, तो क्या अदालत चुप बैठेगी? उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य, नैतिकता और सार्वजनिक व्यवस्था के आधार पर अदालत अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप कर सकती है।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने एक संतुलित दृष्टिकोण पेश करते हुए कहा कि जब अदालत किसी 'अनिवार्य धार्मिक प्रथा' का निर्धारण करती है, तो उसे उस विशेष धर्म के दर्शन (Philosophy) के लेंस से देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक धर्म के विचारों को दूसरे पर थोपकर यह नहीं कहा जा सकता कि कोई प्रथा अनावश्यक है। वर्तमान में मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत की अध्यक्षता वाली यह नौ-न्यायाधीशों की पीठ धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और न्यायिक समीक्षा की सीमाओं जैसे 7 प्रमुख संवैधानिक सवालों पर विचार कर रही है।
Leave A Reviews