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तेंदूखेड़ा: एक के 80 के लालच में बर्बाद हो रहे युवा, तेंदूखेड़ा में सट्टे का बढ़ता अवैध कारोबार


तेंदूखेड़ा, देशबंधु। नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा अंचल में इन दिनों जुआ और सट्टे का अवैध नेटवर्क तेजी से पैर पसार रहा है। रातों-रात अमीर बनने और "एक रुपये के बदले 80 रुपये" कमाने के अंधाधुंध लालच में आकर स्थानीय युवा बड़ी संख्या में इस दलदल में धंसते जा रहे हैं। इस तेंदूखेड़ा अवैध सट्टा कारोबार के चलते जहां कई हंसते-खेलते परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों में इसे लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है। सट्टे की इस भयानक लत के कारण युवाओं की रुचि रचनात्मक और सकारात्मक सामाजिक गतिविधियों से पूरी तरह खत्म होती जा रही है, जो आने वाले भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा है।

तीन जिलों की सीमाओं का फायदा उठा रहे सट्टा माफिया

तेंदूखेड़ा भौगोलिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। यह पूरा क्षेत्र नरसिंहपुर जिले के अंतर्गत आता है, लेकिन इसकी भौगोलिक सीमाएं सीधे तौर पर पड़ोसी जिलों—रायसेन और सागर से सटी हुई हैं। इस त्रिकोणीय सीमा (Border Area) का फायदा उठाकर सट्टा और जुआ संचालित करने वाले अंतर-जिला गिरोह यहाँ आसानी से अपने नेटवर्क को ऑपरेट करते हैं। पुलिसिया कार्रवाई के दौरान आरोपी अक्सर एक जिले की सीमा पार कर दूसरे जिले में छिप जाते हैं, जिससे मैदानी पुलिस को उन्हें दबोचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

शिक्षा और इलाज के बहाने आने वाले छात्र बन रहे निशाना

तेंदूखेड़ा मुख्य रूप से एक बड़ा शैक्षणिक और व्यापारिक केंद्र भी है। यहाँ स्थानीय गांवों के अलावा रायसेन और सागर जिलों के ग्रामीण अंचलों से भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा (स्कूल और कॉलेज) प्राप्त करने के लिए आते हैं। कई छात्र तो यहीं किराए के कमरों में रहकर पढ़ाई करते हैं। इसके अलावा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और मुख्य बाजार होने के कारण रोजाना हजारों लोगों का यहाँ आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में सट्टा माफिया इन भोले-भाले छात्रों और बेरोजगार युवाओं को अपनी ऊंची कमाई का झांसा देकर इस अवैध धंधे का हिस्सा या लती बना रहे हैं।

बेरोजगारी और जल्दी अमीर बनने की चाहत ने बिगाड़ा खेल

स्थानीय जानकारों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि क्षेत्र में रोजगार के पर्याप्त और स्थाई साधन उपलब्ध न होना भी इस तेंदूखेड़ा अवैध सट्टा कारोबार के फलने-फूलने की एक मुख्य वजह है। पर्याप्त नौकरियां या स्वरोजगार न होने के कारण शॉर्टकट से पैसा कमाने की चाहत युवाओं को गलत रास्ते पर धकेल रही है। "एक के 80" का प्रलोभन शुरुआत में तो बहुत आकर्षक लगता है, लेकिन अंत में यह युवाओं को कर्ज के जाल में फंसाकर सामाजिक और मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ देता है।

कागजों में बंद, जमीनी हकीकत में धड़ल्ले से चालू है सट्टा

भले ही पुलिस और प्रशासन के सरकारी दस्तावेजों में तेंदूखेड़ा क्षेत्र को जुआ-सट्टा मुक्त घोषित करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हों, लेकिन जमीनी स्तर की हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट कहानी बयां करती है। क्षेत्र के पान ठेलों, चाय की दुकानों और सुनसान इलाकों में सट्टे की पर्चियां कटने और ऑनलाइन सट्टेबाजी के कोड वर्ड चलने की चर्चाएं आम हैं। हालांकि, नरसिंहपुर जिला पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए समय-समय पर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसके कुछ सकारात्मक परिणाम भी दिखे हैं। लेकिन इसके बावजूद, स्थानीय स्तर पर साठगांठ के चलते जुआ और सट्टे के इस सिंडिकेट पर अब तक पूरी तरह से ताला नहीं लग पाया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे अड्डों को चिन्हित कर सट्टा किंग और खाईवालों पर सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) या जिला बदर जैसी सख्त कार्रवाई की जाए।

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