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MP में शिक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा रीस्ट्रक्चरिंग प्लान: मर्ज होंगे जनजातीय कार्य विभाग के 24,196 स्कूल, सीएम मोहन यादव का फैसला


भोपाल. मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने एक बड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाया है। प्रदेश में अब पूरी स्कूली शिक्षा व्यवस्था एक ही छतरी के नीचे आएगी। इसके तहत जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित किए जा रहे 24,196 स्कूलों का विलय (मर्जर) स्कूल शिक्षा विभाग में किया जाएगा। इस बड़े फैसले के बाद अब पूरा प्रशासनिक नियंत्रण स्कूल शिक्षा विभाग के पास होगा, जिससे नीतियों के क्रियान्वयन में आ रही विसंगतियां दूर होंगी।

4 से 5 साल में चरणबद्ध तरीके से पूरा होगा मर्जर यह विलीनीकरण रातों-रात नहीं होगा, बल्कि इसके लिए 4 से 5 वर्ष की समय-सीमा तय की गई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इसके लिए कैबिनेट नोट का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और इसे अंतिम अभिमत के लिए जनजातीय कार्य विभाग को भेजा जा रहा है। वहाँ से हरी झंडी मिलते ही इसे वित्त विभाग और फिर कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला? दरअसल, प्रदेश के 89 आदिवासी विकासखंडों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए जनजातीय कार्य विभाग को स्कूलों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सरकार की सोच थी कि फोकस अप्रोच से आदिवासी बच्चों को लाभ मिलेगा, लेकिन जमीन पर इसके अपेक्षित परिणाम नहीं दिखे।

  • प्रशासनिक विसंगतियां: दोनों विभागों के अलग-अलग नियमों के कारण 'दोहरी व्यवस्था' खड़ी हो गई थी। स्कूल शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों का क्रियान्वयन जनजातीय क्षेत्रों में ठीक से नहीं हो पा रहा था।

  • शिक्षकों के ट्रांसफर की समस्या: पुराने नियमों के कारण जो शिक्षक जनजातीय विभाग के स्कूलों में नियुक्त हुआ, वह वहीं का होकर रह गया, जिससे कैडर और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हुए।

  • एकरूपता की मंशा: सीएम मोहन यादव की मंशा है कि पूरे प्रदेश के छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह एक समान (Uniform) हो।

"मुख्यमंत्री सचिवालय ने इस कार्य को अपनी टॉप प्रायोरिटी (प्राथमिकता) में रखा है। पिछले दिनों हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग को इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ने के निर्देश दिए गए थे।" - विभागीय सूत्र

कैसे काम करेगा यह मेगा मर्जर प्लान?

सरकार इस संवेदनशील और बड़े बदलाव को तीन मुख्य चरणों में पूरा करेगी:

  1. चरण 1 (प्रशासनिक नियंत्रण): सबसे पहले जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों का एडमिनिस्ट्रेटिव कंट्रोल स्कूल शिक्षा विभाग अपने हाथों में लेगा। यानी सभी गाइडलाइंस और नियम स्कूल शिक्षा विभाग के चलेंगे।

  2. चरण 2 (नई भर्तियां): इसके बाद इन क्षेत्रों में जो भी नई शिक्षकों या स्टाफ की भर्तियां होंगी, वे सीधे स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से ही की जाएंगी।

  3. चरण 3 (स्थापना और कानूनी पेच): सबसे अंत में वर्तमान में कार्यरत स्टाफ का संविलियन किया जाएगा क्योंकि दोनों विभागों के भर्ती नियम अलग हैं। कोर्ट में चल रहे मामलों और जिला स्तर के पेच सुलझाने के लिए विशेष कमेटियां बनाई जाएंगी।

चुनौतियां भी कम नहीं आदिवासी समाज और उनके अधिकारों से जुड़े विषय बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। यही वजह है कि सरकार फूँक-फूँककर कदम बढ़ा रही है। हालांकि जनजातीय स्कूलों के परीक्षा परिणामों में हाल के वर्षों में सुधार हुआ है, लेकिन इस मर्जर को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने अभी से सियासी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

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