अमरकंटक में डीपफेक वीडियो की शिकार बनीं दो छात्राएं, FIR दर्ज होने में देरी पर उठे सवाल
अनूपपुर जिले के अमरकंटक क्षेत्र में एआई (Artificial Intelligence) के दुरुपयोग और पुलिस की कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। यहां दो कॉलेज छात्राओं की पूर्व रूममेट पर आरोप है कि उसने उनकी तस्वीरों को एडिट कर अश्लील डीपफेक वीडियो बनाए और फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए उन्हें विश्वविद्यालय के ग्रुप्स में वायरल कर दिया।
पीड़ित छात्राओं का आरोप है कि वे लगातार दो महीनों तक न्याय के लिए भटकती रहीं, लेकिन अमरकंटक पुलिस ने शुरुआत में उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की। बाद में शहडोल कमिश्नर और डीआईजी के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज किया गया।
छात्राओं के अनुसार, वे पहले एक किराए के रूम में तीसरी लड़की के साथ रह रही थीं, जो समय पर किराया नहीं देती थी। विवाद के बाद वह लड़की अचानक रूम छोड़कर चली गई और जाते-जाते उन्हें बदनाम करने की धमकी भी दी थी।
इसके कुछ दिनों बाद ही पीड़ित छात्राओं के नाम से फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर अश्लील डीपफेक वीडियो फैलाए जाने लगे। आरोप है कि यह कार्य पूर्व रूममेट और उसके भाई द्वारा एआई तकनीक की मदद से किया गया।
छात्राओं ने बताया कि उन्होंने आरोपी पक्ष से बात करने और उसकी मां से शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद उन्होंने पुलिस से कई बार मदद मांगी, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन और टालमटोल मिला।
पीड़ितों का आरोप है कि पहली शिकायत पर पुलिस ने उन्हें साइबर सेल भेज दिया और एफआईआर दर्ज नहीं की। कई दिनों बाद दोबारा शिकायत देने के बावजूद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मामले में शहडोल कमिश्नर के हस्तक्षेप के बाद डीआईजी ने अमरकंटक पुलिस को निर्देश दिए, जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई। हालांकि, पीड़ित छात्राओं का कहना है कि उन्हें अब तक एफआईआर की कॉपी नहीं दी गई है।
छात्राओं ने साफ कहा है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और सोशल मीडिया से फर्जी अकाउंट व आपत्तिजनक सामग्री पूरी तरह हटाई नहीं जाती, वे कॉलेज नहीं लौटेंगी।
परिजनों ने भी उन्हें पूरा समर्थन दिया है और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
यह मामला एआई तकनीक के दुरुपयोग और साइबर अपराधों पर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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