
भोपाल. उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की राजनैतिक और प्रशासनिक कवायद बेहद तेज हो गई है। राज्य में यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण (Final Stage) में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद इस बात के संकेत दिए हैं कि आगामी मानसून सत्र में सरकार इस ऐतिहासिक और बड़े सामाजिक सुधार से जुड़े विधेयक को विधानसभा में पेश कर पारित करा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 7 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति ने इसका प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इस बड़े कानून के लिए व्यापक जनसमर्थन जुटाने के उद्देश्य से समिति के सदस्य लगातार अलग-अलग जिलों का दौरा कर विभिन्न सामाजिक समूहों से संवाद कर रहे हैं। इसके साथ ही आम जनता की राय जानने के लिए ऑनलाइन माध्यम से 12 महत्वपूर्ण सवाल पूछकर 'हां' या 'ना' में फीडबैक मांगे जा रहे हैं।
मध्य प्रदेश का आगामी यूसीसी कानून मुख्य रूप से चार मजबूत सामाजिक और कानूनी स्तंभों पर टिका होगा, जिसका ढांचा इस प्रकार है:
विवाह (Marriage): सभी धर्मों के लिए शादी की एक समान उम्र और नियम।
तलाक और भरण-पोषण (Divorce & Maintenance): पर्सनल लॉ की जटिलताओं को खत्म कर गुजारा भत्ते के पारदर्शी नियम।
उत्तराधिकार व संपत्ति (Inheritance): बेटा-बेटी को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार।
लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationships): आधुनिक रिश्तों को कानूनी दायरे में लाना।
इस ड्राफ्ट में सबसे ज्यादा चर्चा लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर हो रही है। नए प्रावधानों के तहत अब राज्य में बिना रजिस्ट्रेशन (Registration) के लिव-इन में रहना पूरी तरह गैर-कानूनी माना जाएगा। जोड़ों को अनिवार्य रूप से जिला प्रशासन के पास अपने संबंध का पंजीयन कराना होगा।
बच्चों को मिलेगा वारिसाना हक: इस कानून का सबसे प्रगतिशील पहलू यह है कि लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा होने वाले बच्चों को समाज में 'नाजायज' नहीं माना जाएगा। उन्हें माता-पिता की संपत्ति में पूरी तरह से वैध और कानूनी वारिसाना हक (Inheritance Rights) मिलेगा।
विपक्ष ने उठाए नीतिगत सवाल इस बड़े बदलाव को लेकर मध्य प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस कानून की व्यवहारिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लिव-इन का अनिवार्य पंजीकरण व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Right to Privacy) पर सीधा प्रहार है। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए पूछा, "क्या हमारा पारंपरिक समाज इस तरह के पश्चिमी विचारों और उनके सरकारी पंजीकरण को इतनी आसानी से स्वीकार कर पाएगा? सरकार को जल्दबाजी करने के बजाय पहले सामाजिक स्तर पर इस पर आम सहमति बनानी चाहिए।"
फिलहाल, समिति आम जनता और विपक्षी दलों के सुझावों और आपत्तियों का अध्ययन कर रही है, जिसके बाद फाइनल ड्राफ्ट कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
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