
मॉस्को। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब रूस-यूक्रेन युद्ध भी एक विनाशकारी मोड़ पर पहुँच गया है। यूक्रेन ने अपनी रणनीति बदलते हुए अब सीधे तौर पर रूस की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए उसके ऊर्जा और निर्यात ढांचे को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ताजा घटनाक्रम में, सोमवार 6 अप्रैल 2026 की सुबह यूक्रेन ने रूस के काला सागर (Black Sea) स्थित सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह नोवोरोस्सियस्क (Novorossiysk) पर ड्रोन से भीषण हमला किया। इस हमले में रूस के प्रमुख तेल टर्मिनल में आग लग गई और आजोव सागर में अनाज ले जा रहा एक मालवाहक जहाज डूब गया।
यूक्रेनी ड्रोनों ने नोवोरोस्सियस्क स्थित शेस्खारिस (Sheskharis) ऑयल टर्मिनल को निशाना बनाया, जो रूस की सरकारी पाइपलाइन कंपनी 'ट्रांसनेफ्ट' का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
पियर्स को नुकसान: हमले के बाद टर्मिनल के पियर नंबर-1 पर भीषण आग लग गई, जबकि पियर नंबर-2 को भी काफी क्षति पहुँची है।
कंट्रोल सिस्टम तबाह: रिपोर्टों के अनुसार, टर्मिनल के ऑटोमेटेड मीटरिंग और वाल्व असेंबली (SCADA) सिस्टम को भी नुकसान पहुँचा है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि इस कंट्रोल सिस्टम के खराब होने से टर्मिनल से तेल का निर्यात पूरी तरह ठप हो सकता है।
हताहत: हमले के दौरान ड्रोन का मलबा शहर के रिहायशी इलाकों में भी गिरा, जिससे कम से कम 8 लोग घायल हुए हैं।
तेल टर्मिनल के अलावा, यूक्रेन ने रूस के रसद (Logistics) मार्ग पर भी प्रहार किया है। आजोव सागर में गेहूं लेकर जा रहा एक कार्गो जहाज यूक्रेनी ड्रोन हमले के बाद समुद्र में समा गया। रूस समर्थित अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई है और दो लोग लापता हैं। हालांकि यूक्रेन का दावा है कि वह केवल उन्हीं ठिकानों को निशाना बना रहा है जिनका उपयोग रूसी सेना को रसद पहुँचाने या युद्ध के वित्तपोषण (Funding) के लिए किया जा रहा है।
रूसी सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि इन हमलों से रूस की तेल निर्यात क्षमता को गहरा धक्का लगा है। पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के कारण रूस के पास उच्च तकनीक वाले स्पेयर पार्ट्स की भारी कमी है। ऐसे में क्षतिग्रस्त तेल टर्मिनलों और तकनीकी कंट्रोल सिस्टम की मरम्मत करना न केवल महंगा होगा, बल्कि इसमें काफी समय भी लग सकता है।
इस हमले के जवाब में रूस ने यूक्रेन के ओडेसा (Odesa) शहर पर भीषण ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिसमें एक बच्चे सहित तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं, क्रीमिया के सेवास्तोपोल और डोनेट्स्क जैसे इलाकों में भी बिजली आपूर्ति बाधित होने की खबरें हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल की बढ़ती कीमतों के बीच रूस के ऊर्जा ढांचे पर यह हमला मॉस्को के राजस्व को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।
Leave A Reviews