
छतरपुर जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया। गुरुवार को मुआवजा वितरण में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनदेखी से नाराज विस्थापित आदिवासियों और किसानों का गुस्सा फूट पड़ा, जिसके बाद उन्होंने उग्र प्रदर्शन करते हुए मौके पर पहुंची प्रशासनिक टीम को खदेड़ दिया।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि जिला पंचायत सीईओ और अपर कलेक्टर सहित प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी जान बचाकर वापस लौटना पड़ा। अफरा-तफरी के दौरान अधिकारियों को अपने जूते-चप्पल तक मौके पर छोड़ने पड़े। हालात को देखते हुए क्षेत्र में धारा 163 लागू कर दी गई है।
मुआवजे में भ्रष्टाचार के आरोप से भड़का आक्रोश
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परियोजना के तहत दी जाने वाली मुआवजा राशि में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की जा रही हैं। हाल ही में सामने आए पटवारी रिश्वत कांड ने ग्रामीणों के गुस्से को और भड़का दिया है। उनका कहना है कि हक की जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे में उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।
‘चिता आंदोलन’ पर अड़े प्रदर्शनकारी
आक्रोशित ग्रामीणों ने डोधन बांध पर डेरा डालते हुए अनोखा विरोध शुरू किया, जिसे उन्होंने ‘चिता आंदोलन’ नाम दिया है। प्रदर्शनकारी लकड़ियों की चिता बनाकर उस पर लेट गए और चेतावनी दी कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
दिल्ली कूच के दौरान रोके जाने का आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पैदल दिल्ली की ओर जा रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। साथ ही राशन और पानी छीने जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
परियोजना पर उठ रहे सवाल
केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर कई चिंताएं जताई जा रही हैं, जिनमें पन्ना टाइगर रिजर्व के प्रभावित होने, हजारों आदिवासियों के विस्थापन, लाखों पेड़ों की कटाई और पर्यावरणीय संतुलन पर असर जैसे मुद्दे शामिल हैं।
प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव जारी है और पुलिस बल की तैनाती के साथ स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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