
मझगवां, देशबंधु।जनपद पंचायत मझगवां के अंतर्गत आने वाले तराई अंचल में भीषण गर्मी के बीच जल संकट की स्थिति भयावह हो गई है। हालात इतने बदतर हैं कि ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। क्षेत्र के गोडान टोला, रामपुरवा कोलान और भट्टन टोला जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में समस्या विकराल रूप ले चुकी है। जिला प्रशासन तक शिकायतें पहुँचने के बाद, कलेक्टर के निर्देश पर जिला पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह ने प्रभावित क्षेत्रों का सघन दौरा किया और जमीनी हकीकत का जायजा लिया।
सूख गए कुएं, हैंडपंपों ने छोड़ा साथ तराई के इन गांवों में जलस्तर (वाटर लेवल) गिरने से पारंपरिक जल स्रोत पूरी तरह जवाब दे चुके हैं। अधिकांश कुएं सूख गए हैं और जो हैंडपंप ग्रामीणों की प्यास बुझाते थे, वे अब केवल हवा उगल रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति आदिवासी बस्तियों की है, जहाँ ग्रामीणों के पास पेयजल का कोई वैकल्पिक साधन उपलब्ध नहीं है। विवश होकर यहाँ के लोग कुओं की तलहटी में बचे मटमैले और बदबूदार पानी का उपयोग कर रहे हैं, जिससे बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।

जल जीवन मिशन की पोल खुली एक तरफ सरकार 'जल जीवन मिशन' के जरिए घर-घर शुद्ध पेयजल पहुँचाने के दावे कर रही है, वहीं मझगवां के इन इलाकों में यह योजना पूरी तरह ठप्प पड़ी है। पाइपलाइन बिछने के बावजूद नलों से पानी गायब है। निरीक्षण के दौरान सीईओ ने पाया कि ढांचागत कमियों और रखरखाव के अभाव में मिशन का लाभ आदिवासियों तक नहीं पहुँच पा रहा है। ग्रामीणों ने अधिकारी के सामने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उन्हें पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या फिर दूषित पानी पर निर्भर रहना पड़ता है।
प्रशासनिक सक्रियता: टैंकर्स और कुओं की सफाई के निर्देश निरीक्षण के दौरान गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह ने पंचायती अमले और संबंधित विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन बस्तियों में जल स्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं, वहाँ तत्काल टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही, नल-कूप योजना के तहत बनाए गए कुओं की तत्काल सफाई कराने और तकनीकी खराबी वाले हैंडपंपों को प्राथमिकता के आधार पर सुधारने के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेयजल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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