
नई दिल्ली। विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का आह्वान किया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पृथ्वी की रक्षा करना केवल हमारा दायित्व नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक पवित्र संकल्प है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से संस्कृत श्लोक साझा करते हुए भारतीय परंपरा में प्रकृति के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि धरती के संरक्षण में ही समस्त मानवता का कल्याण निहित है। प्रधानमंत्री के इस संदेश को पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चल रहे 'एक पेड़ मां के नाम' और 'स्वच्छ भारत अभियान' का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज हमारे द्वारा उठाए गए छोटे-छोटे कदम ही भविष्य की पृथ्वी को एक नया आकार देंगे। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि पर्यावरण संरक्षण को केवल एक दिन का उत्सव न मानकर इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। नड्डा के अनुसार, सुरक्षित और हरित भविष्य के निर्माण के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस दिशा में ठोस संदेश दिए। मुख्यमंत्री योगी ने सनातन संस्कृति का हवाला देते हुए कहा कि धरती माता हमारा निस्वार्थ पोषण करती है, इसलिए इसे प्रदूषण मुक्त बनाना हमारा कर्तव्य है। वहीं, मुख्यमंत्री धामी ने 'जल, जंगल और जमीन' की रक्षा पर जोर देते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग ही आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला रखेगा। इन शीर्ष नेताओं के संदेशों ने वृक्षारोपण, स्वच्छता और संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता को एक बार फिर जनमानस के केंद्र में ला दिया है।
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