
सतना। विकासखंड रामनगर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अंतर्गत अतिथि शिक्षक वर्ग-2 एवं वर्ग-3 की चयन प्रक्रिया में कथित धांधली एवं गंभीर अनियमितताओं को लेकर NSUI प्रदेश महासचिव आनंद पाण्डेय (बगहा) ने जिला कलेक्टर को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
आनंद पाण्डेय ने आरोप लगाया कि अतिथि शिक्षक चयन प्रक्रिया में मेरिट एवं स्कोर कार्ड को दरकिनार करते हुए अधिक अंक प्राप्त करने वाले योग्य अभ्यर्थियों को चयन से वंचित किया गया, जबकि उनसे कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्तियां प्रदान की गईं। उन्होंने कहा कि यदि चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों एवं मेरिट के आधार पर हुई है, तो अधिक अंक वाले पात्र अभ्यर्थियों की उपेक्षा और कम अंक वालों के चयन का आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
आनंद पाण्डेय ने बताया कि चयन प्रक्रिया की वास्तविकता सामने लाने के लिए 15 अक्टूबर 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि आवेदन के अगले ही दिन 16 अक्टूबर 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा पत्र क्रमांक 374 जारी कर सूचना के संकलन का हवाला देते हुए धारा 7(9) का उल्लेख किया गया और आवेदन का निराकरण कर दिया गया। उनके अनुसार मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर चयन प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराने में विभाग को क्या परेशानी है? धारा 7(9) सूचना देने से इनकार करने का स्वतंत्र आधार नहीं है। विभाग को उपलब्ध अभिलेखों का निरीक्षण एवं नियमानुसार प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध करानी चाहिए।
आनंद पाण्डेय ने ज्ञापन में एक और गंभीर घटनाक्रम की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि जब चयन प्रक्रिया को लेकर शिकायतों एवं RTI आवेदनों का सिलसिला शुरू हुआ, उसी दौरान पहले से नियुक्त कुछ अतिथि शिक्षकों की नियुक्तियां निरस्त की गईं और उनके स्थान पर नए अभ्यर्थियों का चयन किया गया।
विशेष रूप से 29 अक्टूबर 2026 को हुए चयन, 1 नवंबर 2026 को प्रस्तुत त्यागपत्र तथा उसके बाद हुई नई नियुक्ति के पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की गई है।
आनंद पाण्डेय का आरोप है कि नियुक्तियों में बदलाव के बाद भी मेरिट का उचित पालन नहीं किया गया और अधिक प्राप्तांक वाले पात्र अभ्यर्थियों की जगह कम प्राप्तांक वाले अभ्यर्थियों को चयनित किया गया। उन्होंने सवाल किया कि नियुक्तियां निरस्त करने और नए अभ्यर्थियों को चयनित करने का आधार क्या था? क्या पूरी प्रक्रिया GFMS पोर्टल पर नियमानुसार दर्ज की गई? इन सभी सवालों का जवाब प्रशासन को देना चाहिए।
ज्ञापन में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मेरिट संबंधी प्रासंगिक आदेशों, विभागीय दिशा-निर्देशों, विद्यालयवार रिक्तियों, मूल स्कोर कार्ड, अंतिम मेरिट सूची, नियुक्ति आदेशों, त्यागपत्र एवं GFMS पोर्टल के उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही सभी मूल अभिलेखों एवं डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग भी रखी गई है।
आनंद पाण्डेय ने जिला प्रशासन को तीन कार्यदिवस का अंतिम समय देते हुए स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने और ठोस प्रशासनिक कार्रवाई प्रारंभ करने की मांग की है।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो प्रभावित अभ्यर्थियों के साथ शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा। इसके साथ ही RTI आवेदन, विभागीय जवाब, मेरिट सूची, स्कोर कार्ड, नियुक्ति आदेश एवं अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ पूरे मामले को न्यायालय तक ले जाया जाएगा।
आनंद पाण्डेय ने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उन योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों और भविष्य की लड़ाई है, जिनकी मेहनत एवं मेरिट के साथ अन्याय होने की शिकायत सामने आई है। सरकारी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता अनिवार्य है। यदि कहीं भी अनियमितता हुई है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने दो टूक कहा कि योग्य अभ्यर्थियों के हक की लड़ाई न तो ज्ञापन तक सीमित रहेगी और न ही प्रशासनिक आश्वासनों पर रुकेगी। जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर न्यायालय तक संघर्ष किया जाएगा।
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