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भिंड में रेत से भरे डंपर में घुसी स्कूल बस, 7 बच्चे घायल


भिंड जिले अंतर्गत रौन थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। कस्बे में संचालित अमर ज्योति पब्लिक स्कूल की मासूम बच्चों से भरी बस नेशनल हाईवे-552 पर गौरई मोड़ के पास सड़क किनारे खड़े रेत से भरे डंपर से टकरा गई। जोरदार भिड़ंत के कारण बस के आगे का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और अंदर सवार नन्हे-मुन्ने बच्चों में चीख-पुकार मच गई। भिंड में स्कूल बस हादसा होते ही आसपास के खेतों व दुकानों में मौजूद ग्रामीण तुरंत मौके पर दौड़े और खिड़कियों व दरवाजों से घबराए बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना शुरू किया।

7 स्कूली बच्चे घायल, प्राथमिक उपचार के बाद सभी खतरे से बाहर

इस भीषण टक्कर में बस में सवार सात स्कूली बच्चे घायल हो गए। घायलों में अल्पेश राजावत (12 वर्ष) निवासी पडोरा, ऋषभ राजावत (11 वर्ष), कीर्ति राजावत (12 वर्ष), अप्रांश (8 वर्ष), प्रद्युम्न (7 वर्ष), सार्थक राजावत (6 वर्ष) और देव राजावत (6 वर्ष) शामिल हैं। ग्रामीणों की सूचना पर 108 एंबुलेंस, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और सभी घायल बच्चों को रौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया। अस्पताल के डॉक्टरों ने त्वरित जांच के बाद सभी बच्चों को प्राथमिक उपचार दिया। चिकित्सकों के अनुसार गनीमत रही कि किसी भी बच्चे को गंभीर या जानलेवा चोट नहीं आई है और सभी की शारीरिक स्थिति सामान्य व खतरे से बाहर है।

तेज रफ्तार और लापरवाही का आरोप, परिजनों में मची अफरातफरी

प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों का आरोप है कि बस चालक वाहन को बेहद तेज रफ्तार और लापरवाही से दौड़ा रहा था। गौरई कस्बे के पास तीव्र मोड़ पर चालक का बस से नियंत्रण पूरी तरह छूट गया, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर खड़े डंपर से जा भिड़ा। हादसे की खबर मिलते ही घायल बच्चों के रोते-बिलखते परिजन और रिश्तेदार बड़ी संख्या में अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंच गए, जिससे अस्पताल परिसर में काफी देर तक गहमागहमी और तनावपूर्ण माहौल बना रहा। रौन थाना पुलिस ने मौके का मुआयना कर दोनों वाहनों को कब्जे में लिया है और चालक की लापरवाही के संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

स्कूल बसों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर उठे सवाल

इस सड़क दुर्घटना ने एक बार फिर जिले में संचालित स्कूल बसों की सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट और परिवहन विभाग की स्पष्ट गाइडलाइन के बावजूद अधिकांश शैक्षणिक संस्थानों की बसों में स्पीड गवर्नर, पैनिक बटन, आपातकालीन द्वार (इमरजेंसी गेट) और अग्निशामक यंत्रों की नियमित जांच नहीं होती। साथ ही ड्राइवरों के चरित्र सत्यापन और पेशेवर ट्रेनिंग को लेकर भी प्रबंधन लापरवाह बना रहता है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन व आरटीओ से मांग की है कि जिले भर में चल रहीं सभी स्कूल बसों की फिटनेस की औचक जांच की जाए और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के परमिट तुरंत रद्द किए जाएं।

Date & Time : 2026-09-09 08:36:24

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