
भोपाल/नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में शासकीय कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित 'प्रमोशन में आरक्षण' विवाद में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ आया है। देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने इस मुद्दे से जुड़ी सभी याचिकाओं और अपीलों पर अगले तीन महीनों के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्णय लिया है। इस मामले की त्वरित और अंतिम सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही एक विशेष उचित पीठ (स्पेशल बेंच) का गठन किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त आदेश के बाद जबलपुर हाईकोर्ट में इस मामले से संबंधित चल रही सुनवाई पर फिलहाल विराम लग गया है। जब तक शीर्ष अदालत का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक हाईकोर्ट इस विषय पर कोई आदेश पारित नहीं कर सकेगा।
त्वरित सुनवाई का फैसला: कर्मचारी संगठनों द्वारा दाखिल जल्द सुनवाई की अर्जी पर विचार करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉय माल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने यह आदेश जारी किया।
सरकार की याचिकाएं: मध्य प्रदेश सरकार की ओर से इस संवेदनशील विषय पर 6 अलग-अलग सिविल अपील और स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, जिनमें कई कर्मचारी संगठन पक्षकार हैं।
हाईकोर्ट की प्रक्रिया पर रोक: अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश से जबलपुर हाईकोर्ट में जारी प्रक्रिया स्वतः रुक गई है। अब इस कानूनी विवाद का पूरा फैसला केवल सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर निर्भर करेगा।
'जनरैल सिंह' केस के साथ टैग: वर्ष 2011 से 2026 तक देश भर में प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े सभी बड़े विवादों को सुप्रीम कोर्ट ने 'जनरैल सिंह एवं अन्य बनाम लक्ष्मीनारायण गुप्ता' केस के साथ क्लब (संलग्न) कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से मध्य प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को उम्मीद जगी है कि कई वर्षों से अटका प्रमोशन का मुद्दा अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकेगा।
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