
डिंडौरी जिले में विकास और सुगम स्वास्थ्य सेवाओं के तमाम दावों के बीच एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। शहपुरा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत पाकर बघर्रा के कलंगी टोला में सिलगी नदी पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अपनी जान हथेली पर रखकर नदी पार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हाल ही में प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीणों को चादर की डोली का सहारा लेना पड़ा।
गांव के युवाओं और परिजनों ने चादर और डंडों की मदद से डोली तैयार की और महिला को उसमें बैठाकर करीब 100 मीटर चौड़ी सिलगी नदी के तेज व गहरे बहाव के बीच से कंधों पर उठाकर सुरक्षित किनारे पहुंचाया। नदी पार कराने के बाद महिला को वाहन के जरिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शहपुरा में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की देखरेख में उसका सुरक्षित प्रसव हुआ। गनीमत रही कि समय रहते महिला अस्पताल पहुंच गई और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं, लेकिन इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में बुनियादी स्वास्थ्य अधोसंरचना और संपर्क मार्गों की बदहाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कलंगी टोला की आबादी लगभग 300 है। गांव के निवासियों के लिए सिलगी नदी को पार करना दैनिक जरूरतों—राशन, बच्चों की पढ़ाई, हाट-बाजार और रोजगार—के लिए एक स्थायी जोखिम बन चुका है। विशेष रूप से बारिश के मौसम में जब नदी का जलस्तर बढ़ जाता है, तो यह गांव मुख्य सड़क और ब्लॉक मुख्यालय से पूरी तरह कट जाता है।
ऐसी विकट परिस्थितियों में सबसे अधिक मार बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों और प्रसूताओं पर पड़ती है। गांव तक एंबुलेंस या कोई चारपहिया वाहन नहीं पहुंच पाता, जिससे मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीणों को इसी तरह डोली या खाट का सहारा लेकर नदी पार करानी पड़ती है। आपातकालीन समय में थोड़ी सी भी देरी किसी की जान पर भारी पड़ सकती है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से सिलगी नदी पर पुलिया या उच्च स्तरीय रपटा/पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। ग्रामीणों के अनुसार, नदी पर एक अदद पुल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि उनके सुरक्षित जीवन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक समय पर पहुंचने की बुनियादी जीवनरेखा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) से मांग की है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शीघ्र पुल की तकनीकी स्वीकृति देकर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए।
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