
मैहर जिले अंतर्गत ग्राम भटूरा में प्रस्तावित नई चूना पत्थर (लाइम स्टोन) खदान की पर्यावरणीय स्वीकृति को लेकर आयोजित होने वाली लोक सुनवाई विवादों के घेरे में आ गई है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB), क्षेत्रीय कार्यालय सतना द्वारा जारी पत्र क्रमांक 956/क्षे.का./प्रनिबो/पूर्व/2026 (दिनांक 25/09/2026) के तहत मेसर्स श्री अनिल नागरथ, भटूरा लाइम स्टोन माइन के लिए लोक सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 (बुधवार) को सुबह 11:00 बजे प्रस्तावित खनन स्थल के पास नियत की गई है।
प्रस्तावित परियोजना 2.696 हेक्टेयर रकबे पर 1,50,213.75 टन प्रति वर्ष (TPA Max) क्षमता की खदान के संचालन से संबंधित है। प्रदूषण बोर्ड ने कलेक्टर मैहर, जिला पंचायत सतना, जनपद पंचायत मैहर, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र और भटूरा ग्राम पंचायत को ईआईए (पर्यावरणीय प्रभाव आकलन) रिपोर्ट जन सामान्य के अवलोकनार्थ रखने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का गंभीर आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया जमीनी स्तर पर व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के बजाय महज औपचारिक कागजी कोरम पूरा करने तक सीमित होकर रह गई है।
भटूरा क्षेत्र पहले से ही स्थापित विशाल सीमेंट संयंत्रों, स्टोन क्रेशरों और दर्जनों वैध-अवैध खदानों के भारी पर्यावरणीय दबाव से जूझ रहा है। क्षेत्रवासियों के अनुसार:
घरों में दरारें और गिरता भूजल: भारी ब्लास्टिंग (विस्फोटों) के कंपन से गांव के कई पक्के मकानों में दरारें आ चुकी हैं और अत्यधिक खनन के चलते भूजल स्तर लगातार नीचे खिसक रहा है, जिससे पेयजल और सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
धूल की सफेद चादर और फसल बर्बादी: दिन-रात उड़ने वाली चूने और सीमेंट की बारीक धूल से पूरे इलाके के पेड़-पौधे और फसलें ढक जाती हैं, जिससे कृषि उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
गंभीर स्वास्थ्य जोखिम: लगातार धूल के संपर्क में रहने के कारण ग्रामीण सिलिकोसिस, दमा (अस्थमा) और त्वचा संबंधी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि लोक सुनवाई की सूचना और ईआईए रिपोर्ट की प्रतियां उन किसानों और मजदूरों तक पहुंच ही नहीं पातीं, जिनकी जमीन, हवा और आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित होती है। कथित तौर पर पंचायत प्रतिनिधियों और गिने-चुने लोगों की मौजूदगी में ही सहमति दिखाकर प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया जाता है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने मांग उठाई है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को केवल कंपनियों द्वारा प्रस्तुत की गई ईआईए फाइलों और डिजिटल निगरानी आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय मैहर, भटूरा, अमदरा और रामनगर क्षेत्र के गांवों में स्वतंत्र स्वास्थ्य सर्वेक्षण कराना चाहिए।
नागरिकों का कहना है कि जब तक ग्रामीणों के स्वास्थ्य (फेफड़ों की जांच), खेतों की उपजाऊ मिट्टी और कुओं के भूजल नमूनों की निष्पक्ष लैब जांच नहीं कराई जाती, तब तक नई खदानों को पर्यावरणीय स्वीकृति देना आम जनता के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ है।
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