
खंडवा. मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल की आर्थिक तकदीर बदलने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹4,415 करोड़ की लागत वाली 234 किलोमीटर लंबी बैतूल-खंडवा-खरगोन-बड़वानी सड़क परियोजना को मंजूरी दे दी है। यह नया 'इकोनॉमिक कॉरिडोर' न केवल परिवहन को सुगम बनाएगा, बल्कि निमाड़ को सीधे गुजरात के औद्योगिक नेटवर्क और बंदरगाहों से जोड़कर विकास के नए द्वार खोलेगा।
इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि खंडवा जिले के हिस्से आई है। नेशनल हाईवे एनएच-347बी के उन्नयन से खंडवा का 'देशगांव' अब दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों का संगम केंद्र (जंक्शन) बन जाएगा:
इंदौर-हैदराबाद राजमार्ग (भारतमाला योजना): जो उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी को मजबूत कर रहा है।
बैतूल-जुलवानिया (अहमदाबाद) इकोनॉमिक कॉरिडोर: जो पूर्व-पश्चिम के व्यापारिक मार्ग को नई गति देगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, दो हाईवे का जंक्शन बनने से देशगांव और खंडवा के आसपास लॉजिस्टिक पार्क्स, वेयरहाउसिंग, ट्रांसपोर्ट हब और लघु उद्योगों की बाढ़ आएगी, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे।
निमाड़ क्षेत्र अपनी केला, कपास, सोयाबीन और गेहूं की पैदावार के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। वर्तमान में बुनियादी ढांचे की कमी के कारण किसानों को अपनी फसल बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भारी लागत और समय का नुकसान उठाना पड़ता है।
परिवहन लागत में कमी: नई सड़क परियोजना से माल ढुलाई का समय कम होगा।
गुजरात के बंदरगाहों तक पहुंच: खंडवा, खरगोन और बड़वानी के कृषि उत्पाद अब सीधे गुजरात के बंदरगाहों तक तेजी से पहुंच सकेंगे, जिससे किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार का लाभ मिल सकेगा।
यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से को गुजरात और महाराष्ट्र के व्यापारिक केंद्रों के साथ अधिक प्रभावी ढंग से एकीकृत करेगा। यह न केवल माल परिवहन के लिए उपयोगी होगा, बल्कि पर्यटन और औद्योगिक निवेश को भी आकर्षित करेगा।
सड़क संपर्क मजबूत होने से खंडवा अब केवल एक 'ट्रांजिट पॉइंट' नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश के एक प्रमुख आर्थिक केंद्र (Economic Center) के रूप में उभरेगा। सरकार की इस पहल से कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार और क्षेत्रीय विकास की नई तस्वीर उभरती दिखाई दे रही है।
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