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इंदौर अग्निकांड: 'सुरक्षा' बना 'काल', क्या डिजिटल लॉक ने छीनीं 8 जिंदगियां?, जाने विशेषज्ञों की राय

इंदौर. रबर कारोबारी मनोज पुगलिया के घर में लगी आग ने केवल 8 लोगों की जान नहीं ली, बल्कि आधुनिक घरों में इस्तेमाल होने वाले 'स्मार्ट लॉक' की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि आग लगने के दौरान घर के डिजिटल लॉक अनलॉक नहीं हो पाए, जिससे अंदर फंसे लोग बाहर नहीं निकल सके और दम घुटने व जलने से उनकी मौत हो गई.

क्यों 'धोखा' दे जाते हैं स्मार्ट लॉक? (विशेषज्ञों की राय)
SGSITS के इलेक्ट्रॉनिक्स विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत बनसोड़ और प्रो. सतीश कुमार जैन के अनुसार, डिजिटल लॉक के फेल होने के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण हो सकते हैं:

हाई हीट और सेंसर फेलियर: आग के कारण तापमान अत्यधिक बढ़ने पर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और सेंसर पिघल सकते हैं या काम करना बंद कर देते हैं.

पावर कट या शॉर्ट सर्किट: आग लगने पर अक्सर बिजली गुल हो जाती है. अगर लॉक का बैकअप सिस्टम या बैटरी हीट से प्रभावित हो जाए, तो वह जाम हो सकता है.

इमरजेंसी ओवरराइड की कमी: कई सस्ते या पुराने मॉडल के डिजिटल लॉक्स में 'पैनिक रिलीज' (Panic Release) फीचर नहीं होता, जो अंदर से बिना चाबी या कोड के तुरंत खुल सके.

सुरक्षित स्मार्ट लॉक कैसे चुनें? एक्सपर्ट टिप्स
मैकेनिकल ओवरराइड (Manual Key): हमेशा ऐसा लॉक चुनें जिसमें डिजिटल फेलियर की स्थिति में फिजिकल चाबी लगाने का विकल्प हो.

फायर-रेटेड सर्टिफिकेशन: ताला खरीदते समय देखें कि वह हाई टेम्परेचर सहने के लिए प्रमाणित (Fire-rated) है या नहीं.

पैनिक एग्जिट फीचर: अच्छे स्मार्ट लॉक्स में अंदर की तरफ एक हैंडल होता है जिसे बस घुमाने या खींचने पर दरवाजा तुरंत खुल जाता है, चाहे वह बाहर से लॉक ही क्यों न हो.

लो-बैटरी अलर्ट: हमेशा स्मार्ट कनेक्टिविटी वाले लॉक लें जो मोबाइल पर बैटरी कम होने का नोटिफिकेशन दें.

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