
इंदौर (तिलक नगर). ग्रेटर बृजेश्वरी कॉलोनी में बीती रात एक भयानक हादसे ने मानवता को रुला दिया. घर में चार्जिंग पर लगी इलेक्ट्रिक कार (EV) में हुए शॉर्ट सर्किट ने ऐसी आग पकड़ी कि देखते ही देखते पूरा मकान 'फर्नेस' (भट्टी) बन गया. इस भीषण अग्निकांड में परिवार के 8 सदस्यों की जान चली गई, जबकि कुछ सदस्य मौत के मुंह से बाल-बाल बचे.
हादसे के वो खौफनाक मंजर: रोंगटे खड़े कर देने वाली सच्चाई
इंटीरियर बना काल: घर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया प्लायवुड और लकड़ी का इंटीरियर इस आग में घी का काम कर गया. जहरीले धुएं और आग की लपटों ने किसी को संभलने का मौका तक नहीं दिया.
बैठी हुई हालत में मिला शव: रेस्क्यू टीम को परिवार की बड़ी बहू का शव सोफे पर बैठे हुए हालत में मिला. धुएं के कारण दम घुटने से शायद उन्हें भागने का अवसर भी नहीं मिला और वे वहीं सुध-बुध खो बैठीं.
परंपरा ने दी जिंदगी: परिवार की छोटी बहू इस काल के ग्रास से इसलिए बच गईं क्योंकि एक पारिवारिक परंपरा के चलते वे उस दिन अपने मायके गई हुई थीं.
बालकनी से बचाई जान: कारोबारी मनोज पुगलिया के बेटों—सौरभ, हर्षित और सौमिल ने मां सुनीता के साथ बालकनी से पड़ोसियों को आवाज दी. पड़ोसियों ने जाली तोड़कर सीढ़ी लगाई, जिससे ये चार सदस्य सुरक्षित बाहर आ सके, लेकिन बाकी अपनों को नहीं बचा पाए.
EV चार्जिंग और होम सेफ्टी: विशेषज्ञों की चेतावनी
इस हादसे ने इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग और घरों में अग्निशमन (Fire Safety) उपायों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
क्या घर की वायरिंग EV चार्जिंग का लोड सहने के लिए पर्याप्त थी?
लकड़ी के इंटीरियर वाले घरों में स्मोक डिटेक्टर का न होना जानलेवा साबित हुआ.
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