
कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम सिमरिया में उस समय हड़कंप मच गया, जब बेलकुंड नदी के पुल के पास एक विशालकाय मगरमच्छ को धूप सेंकते देखा गया। नदी के इतने करीब मगरमच्छ की मौजूदगी की खबर जैसे ही फैली, पूरे गांव में डर का माहौल बन गया। ग्रामीणों के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली बेलकुंड नदी अब खतरे का केंद्र बनती जा रही है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं।
नदियों और तालाबों में बढ़ी सक्रियता, ग्रामीण चिंतित स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में क्षेत्र की नदियों और तालाबों में मगरमच्छों की सक्रियता काफी बढ़ गई है। पहले इस इलाके में मगरमच्छ कभी नहीं देखे जाते थे, लेकिन अब इनका दिखना आम हो गया है। ग्राम पंचायत के सरपंच विनय ज्योतिषी ने बताया कि पिछले साल भी इसी नदी में मगरमच्छ देखा गया था। उस दौरान नदी की गहराई और तेज बहाव के कारण उसे रेस्क्यू करना संभव नहीं हो सका था, जिसके कारण अब ग्रामीणों और मवेशियों पर लगातार खतरा मंडरा रहा है।
वन विभाग की टीम अलर्ट, घाटों पर निगरानी शुरू मगरमच्छ की सूचना मिलते ही रेंजर अजय मिश्रा के नेतृत्व में वन विभाग की टीम सिमरिया पहुंची। टीम ने नदी के विभिन्न घाटों का बारीकी से निरीक्षण किया। हालांकि, जांच के दौरान मगरमच्छ दोबारा नजर नहीं आया, लेकिन वन विभाग ने सुरक्षा के मद्देनजर टीम को अलर्ट मोड पर रखा है। रेंजर ने स्पष्ट किया है कि मगरमच्छ की सटीक लोकेशन मिलते ही विशेषज्ञ टीम के माध्यम से उसका रेस्क्यू किया जाएगा और उसे उसके प्राकृतिक आवास (बड़े जलाशय) में सुरक्षित छोड़ा जाएगा।
प्रशासन की चेतावनी: नदी किनारे न जाएं ग्रामीण वन विभाग ने एहतियात के तौर पर ग्रामीणों के लिए चेतावनी जारी की है। लोगों को नदी के घाटों पर जाने, वहां कपड़े धोने या स्नान करने से मना किया गया है। साथ ही, मवेशियों को भी नदी के पानी से दूर रखने की सलाह दी गई है। रेंजर अजय मिश्रा ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि मगरमच्छ दोबारा दिखाई दे, तो स्वयं उसे भगाने का प्रयास न करें और तत्काल वन विभाग को सूचित करें ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके।
Leave A Reviews